मुश्ताक अहमद
लखनऊ।भाजपा 2026 में होने वाले विधान परिषद चुनाव में जीते हुए प्रत्याशियों को फिर मौका दे सकती है। विधान परिषद चुनाव की तैयारियों को लेकर बीते दिनों भाजपा ने बैठक बुलाई। इसमें चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा होनी थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि बैठक में पार्टी के मौजूदा एमएलसी भी मौजूद रहे।रणनीतिक बैठक में इन चेहरों की मौजूदगी ने कई चर्चाओं का जन्म दे दिया।
सूबे में एमएलसी की 11 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इनमें से 5 सीट स्नातक और 6 शिक्षक कोटे की है। भाजपा के पास इनमें से जीती हुई 6 सीटें हैं। इनमें 3-3 शिक्षक व स्नातक कोटे की है। पार्टी की कोशिश अबकी बार इस संख्या में इजाफा करने की है। पार्टी के तमाम नेता इन सीटों पर नजरें भी जमाएं हुए हैं। कई काफी पहले से तैयारी में में जुटे हैं। चुनावी तैयारियों के लिए प्रदेश नेतृत्व ने प्रदेश महामंत्री अमरपाल मौर्य के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई है। बीते दिनों रणनीति को लेकर इस कमेटी की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी व महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह मौजूद रहे। खास बात यह थी कि इस बैठक में पार्टी के जीते हुए सभी एमएलसी भी मौजूद थे। यहीं से इस चर्चा को बल मिला कि क्या पार्टी इन सभी चेहरों को दोबारा रिपीट करने जा रही है। हालांकि पार्टी में आधिकारिक रुप से इस पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। वहीं यदि जीते हुए चेहरे रिपीट होते हैं तो केवल हारी हुई सीटों पर ही कुछ नये चेहरों को मौका मिल सकता है।
माननीय सपा और भाजपा दोनों में ठिकाना तलाश रहे
सूबे में एक एमएलसी व एक पूर्व एमएलसी ऐसे भी हैं जो किसी भी तरह भाजपा का चुनाव चिह्न पाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं को सेट भी कर लिया है। हालांकि भाजपाइयों से गलबहियां तो उन्होंने पिछले चुनाव में निर्दलीय रहते हुए ही कर ली थी। वहीं पूर्व एमएलसी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी का विरोध लोगों के गले नहीं उतर रहा है। वहीं जानकारों का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े इन माननीय को सरकारी संरक्षण की दरकार है। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि भाजपा में सफलता न मिल पाने की स्थिति में वे सपा का विकल्प भी साथ लेकर चल रहे हैं।

