गुलाम जीलानी बेग
सादुल्लाहनगर,बलरामपुर।एक तरफ़ जहां भारत सरकार डिजिटल इंडिया की तरफ़ लोगों को जागरूक करने में लगी है और जनता को बैंकों से अच्छी सुविधा देने के लिए छोटे छोटे बैंको को ख़त्म कर के उनको बड़े बैंकों के साथ विलय किया जा रहा हैं। ताकि जनता को बैंकों का चक्कर कम लगाना पड़े लेकिन ये ख्वाब भारत सरकार का अधूरा साबित हो रहा है।

वहीं उत्तरप्रदेश ग्रामीण बैंक के शाखा रामपुर ग्रांट ज़िला बलरामपुर में एटीम और चेक बुक का फार्म नदारद।
बैंक कर्मचारियों से मांगने पर ग्राहकों से कहा जाता है कि बग़ल में फोटो काफी की दुकान से ले लें फार्म ।
जब फोटो कॉपी की दुकान पर ग्राहक फॉर्म लेने जाते हैं जहां पर उन्हें एक फार्म के बदले देना पड़ता है 5 रूपया।
यहां पर बैंक की मिली भगत से अवैध तरीके से खाताधारकों से वसूला जाता है पैसा।
यही मामला यू पी ग्रामीण बैंक शाखा सादुल्लाह नगर का भी है ।
यहां पर अगर कोई खाता धारक अपने खाते की के वाई सी करवाने आता है, तो उसको 100 रु खाते में जमा करने के बाद फिंगर प्रिंट्स के लिए मिनी ब्रांच भेजा दिया जाता है।जहां खाता धारक से 40रू तक अवैध वसूली किया जा रहा है।
जबकि ये सारे काम बैंक के कार्य क्षेत्र में आते हैं। जब से प्रथमा ग्रामीण बैंक से उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक का विलय हुआ है तब से खाता धारकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लगभग सभी खाताधारकों के लेनदेन में दिक्कतें आ रही हैं इसीलिए गरीब किसान मजदूर खाता धारक बैंकों का चक्कर काट रहे हैं।
आप को बताते चलें की जनवरी 2026से सभी ग्राहकों के खाते से आधार से पैसा निकलना बंद होगया है। जब खाताधार खाते को सही कराने के लिए यूपी ग्रामीण के शाखा सादुल्लाह नगर, या मददो घाट ,पहुंचता है तब उस को बैंक से ये बताया जाता है कि आप ई के वाई सी कराने के लिए बैंक के मिनी ब्रांच मद्दों भट्ठा चले जाएं वहां पर हो जाएगा।
जब भोले भाले ग्राहक किसान दर दर की ठोकरें खाते हुए बायों मेट्रिक अपडेट कराने के लिए उत्तरप्रदेश ग्रामीण बैंक के मिनी ब्रांच पहुंचते है तब उन ग्राहकों से फ़ोटो कॉपी के नाम पर बायों मेट्रिक का शुल्क 30से 40रूपये वसूल करते हैं जबकि यह सारा काम बैंक का है।
दुर्भाग्य की बात यह है कि जो सुविधा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के मुख्य ब्रांचों में होनी चाहिए वह मिनी ब्रांच में होता है ऐसे में ग्राहक दर दर भटकने पर मजबूर हैं,
आप को यह भी बता दें कि यदि किसी खाता धारक का पासबुक गायब हो जाता है और वह ब्रांच पर दूसरी पासबुक बनवाने का अप्लाई करता है तो उसे 150 रुपए वसूले जाते हैं और यह उसके खाते में भी नहीं जमा होता है। इसका कोई पता नहीं है कि यह पैसा कहां जाता है यदि वह 150 रुपए देता है तब उसकी दूसरी पासबुक बना करके दी जाती है अन्यथा वह बैंक का चक्कर काटता रहता है।
इस सम्बन्ध में जब उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के शाखा मद्दों घाट के मैनेजर मिनहाज खान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मुझे इस के बारे में कोई जानकारी नहीं है अगर ऐसा है तो मिनी ब्रांच के खिलाफ़ उचित करवाई कि जाएगी।

