कर्नलगंज,गोंडा। जिले में एक हृदयविदारक और प्रशासनिक लापरवाही का शर्मनाक मामला सामने आया है,जिसने कानून-व्यवस्था,चिकित्सा व्यवस्था और पुलिस तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। मामला कर्नलगंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम लालेमऊ का है,जहां दबंगों ने एक महिला के घर का छप्पर जबरन गिराने की कोशिश की और विरोध करने पर महिला और उसके पुत्र पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया।

हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। शरीर के कई हिस्सों में गहरे जख्म आए और वे खून से लथपथ हालत में बेहोश होकर ज़मीन पर पड़े रहे। मौके पर पहुंची डायल 112 की पीआरवी ने किसी तरह दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्नलगंज पहुंचाया,जहां से उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद गोंडा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि गोंडा जिला अस्पताल में एफआईआर दर्ज न होने के कारण डॉक्टरों ने इलाज से इनकार कर दिया। मां-बेटे की हालत गंभीर थी, फिर भी उन्हें घंटों स्ट्रेचर पर तड़पते रहने के लिए छोड़ दिया गया। डॉक्टरों और स्टाफ ने न तो भर्ती किया और न ही कोई संवेदनशीलता दिखाई। बता दें कि राज्य सरकार जहां मिशन शक्ति, नारी सुरक्षा और आपात चिकित्सा सेवा की बात करती है, वहीं ज़मीनी हकीकत यह है कि पीड़ितों को सिर्फ इसलिए इलाज नहीं मिला क्योंकि उनके पास पुलिस की रिपोर्ट नहीं थी।

