एसडीएम के आगे कोई मायने नहीं रखता डीएम का आदेश,दबंगो ने जबरन कटाई गेंहू की फसल
पीडित ने आईजी,एसपी व डीएम से लगाई गुहार
गोण्डा।जनपद के वजीरगंज थाना क्षेत्र मे सीएम योगी का आदेश नही बल्कि दबंगो का सिक्का चलता है। जहां दबंगों के आगे वजीरगंज थाने की पुलिस बौनी साबित हो रही है। यही ही नहीं एसडीएम के आगे जिलाधिकारी का निर्देश नक्कार खाने में तूती की आवाज बनकर रह जाती है।ताजा मामला वजीरगंज थाना क्षेत्र के रामपुर खरहंटा गांव का है।रामपुर खरहंटा गांव में लगी गेंहूँ की फसल को पूर्व प्रधान प्रदीप सिंह उर्फ दद्दन सिंह ने रातों-रात काट कर खेत से गायब कर दिया। जिसे लेकर पीड़ित युवक ने थाने पर तहरीर दी मगर आज तक एफआईआर दर्ज नही हुआ। जिसे लेकर पीड़ित युवक ने दिनांक 15अप्रैल 2026 को गोण्डा जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल व आईजी अमित पाठक को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
रामपुर खरहंटा निवासी रामेश्वर दत्त सिंह का आरोप है कि उनके पिता द्वारा वर्ष 2003 में गाटा संख्या 206 में 22 बिस्वा जमीन बैनामा लिया था, जिसका क्षेत्रफल भी अलग कर दिया गया था, यहाँ तक कि विक्रेता के बेटे ने तहसील में लिखित बयान भी दर्ज कराया था कि अब इस भूमि पर क्रेता का कब्ज़ा है। जिसका मालिक क्रेता खुद है। आरोप है कि उक्त जमीन पर क्रेता का पूर्णतया अधिकार हो गया जिस पर उनके द्वारा गेंहू कि फसल लगाई गई। जो विपक्षियों को नागवार गुजरा। पीड़ित का आरोप है कि उसके विपक्षी काफी दबंग हैं, जबरन कह रहे हैं कि इस जमीन पर मेरा अधिकार है और इस फसल को या तो हम काट लेंगे या फिर जला देंगे। पीड़ित रामेश्वर दत्त सिंह ने बताया कि 2025 में मेरे पिता की मौत के बाद विपक्षी के हौसले और भी बुलंद हो गए। जमीन पर जबरन कब्ज़ा करने हेतु फसल पर निगाह गड गई।
पीड़ित को जब इस बात की भनक लगी तो उसने 6 अप्रैल को पूरे कागजात के साथ जिलाधिकारी के पास पहुंचा। जहां जिलाधिकारी ने कागजात को देखते हुए एसडीएम को आदेशित किया कि फसल को जाकर कटवाया जाए। मगर ये आदेश नक्कार खाने में तूती की आवाज बनकर रह गया। एसडीएम मौके पर जाने से दबंग पूर्व प्रधान ने दिनांक 13 व 14 अप्रैल की मध्य रात्रि में लगी गेंहू की फसल को काट लिया। पीड़ित का आरोप है कि सुबह उसने जब डायल 112 पर फोन किया तो मौके पर डायल 112 पहुंची तबतक भूसा व गेंहू दबंग प्रधान के घर पर पाया गया। जब पीड़ित थाने पहुंचा तो थानेदार ने फसल दिलाने कि बजाय ये गेहूं को 145 धारा के तहत क्रूक करने को कहा, पीड़ित का आरोप है कि उसको 10 हजार कि छति पहुंची है। इसके बावजूद थाने मे एफआईआर दर्ज नही किया जा रहा है। पीड़ित ने थाने कि पुलिस पर पूर्व प्रधान से मिलीभगत का आरोप लगाया है।
उच्चाधिकारियों का आदेश कोई मायने नहीं रखता
कितनी हैरानी कि बात है कि जहाँ सूबे के सीएम योगी आदित्य नाथ का सख्त आदेश है कि पीड़ितों के साथ न्याय किया जाए वहीं दूसरी ओर थानेदार योगी कि मंशा पर पानी फेरते देखे जा रहे हैं| फिलहाल पीड़ित ने जिलाधिकारी के साथ ही एसपी व आईजी के चौखट पर पहुंचकर मामले मे जांच कर कार्यवाही की मांग की है। उसका कहना है की अगर यहाँ से न्याय न मिला तो वह शीघ्र ही योगी के दरबार जाकर न्याय की गुहार लगाएगा ।

