गुलाम जीलानी बेग
सादुल्लानगर,बलरामपुर।माहे रमजान में दुनियाभर के करोड़ों मुसलमान दिनभर रोज़ा रख कर भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं,क्यों कि रमजान एक ऐसा महीना है जिसमें जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, इसकी एक रात की इबादत हजार महीनों से अफजल है, इस रात में मलाइका अपने रब के हुकुम से जमीन पर सूरज निकलने तक आते रहते हैं, इस रात में जो शख्स इबादत करता है उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं, उस रात को शब कदर कहते हैं, जो इक्कीस रमजान की रात से तीस रमजान की ताक रातों में से किसी एक रात में होती है।वह शख्स महरूम है जो इसकी भलाई से फायदा ना उठा पाए, और महीने के अलावा इस महीने में एक नेकी का बदला अल्लाह पाक अपने बंदों को सत्तर नेकियां अता फरमाता है, उपवास(रोज़ा) रखकर इंसान भूखे-प्यासे लोगों के दर्द का एहसास करता है। उनके दुख को समझने का बेहतरीन मौका रमजान का महीना है।
इस महीने की इबादत और जिक्र व अजकार से अल्लाह का कुर्ब हासिल होता है। हर मुसलमान इस महीने का एहतराम करता है। रमजान का मकसद यह है कि जब एक दौलतमंद, एक अमीर व्यक्ति जिसने कभी भूख और प्यास देखी नहीं, जब वह रमजान – में रोजे रखेगा तो उसे एहसास-ए-भूख और प्यास होगा। जब उसे भूख और प्यास का एहसास होगा तो वह गरीब, मजबूर और भूखों के दर्द को समझेगा। इसीलिए इस्लाम ने रमजान में अपने माल की जकात और रोजे रखने के बाद सदका ए फितर अदा करने का हुक्म दिया है। इस मुबारक महीने में दौलत मंद अपने माल की जकात निकाल कर गरीबों में खूब बांटते हैं ,रोजे रखने के बाद सदका ए फितर देने का हुक्म इसलिए दिया गया है कि दौलत मंदों को गरीबों का दरवाजा दिखाया जा सके, जिससे वह उसकी मदद करता रहे, यही रमजान और इस्लाम का संदेश है। 11 महीने बाद रमजान का एक महीना आता है जिसमे ईमान वाला अपने ईश्वर को राजी करने व अपने गुनाहों की माफी करने और मरने के बाद जन्नत में जाने की दुआएं खूब खूब करता है।

