पप्पू अंसारी
अयोध्या।मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ० जगदीश सिंह आठ माह पूर्व विभाग से सेवानिवृत्ति हो गए। अपने कार्यकाल के दौरान अपने अधीनस्थ कनिष्ठ लिपिक शिवम श्रीवास्तव की गर्दन फंसा दी। अपर निदेशक ग्रेड-2 डॉक्टर एमके कौशिक बिना बैंक से कर्ज स्वीकृत अनुदान देने के प्रकरण को निदेशक, पशुपालन को संदर्भित कर जांच हरिंग्टनगंज के पशु चिकित्साधिकारी विवेक कुमार शुक्ल को सौंपी है। यह जांच पटल लिपिक शिवम श्रीवास्तव के विरुद्ध है। पत्रावली में उनके हस्ताक्षर हैं।
डा०शुक्ल के पास पहले से शिवम श्रीवास्तव की एक विभागीय जांच लंबित है। मुख्य कोषाधिकारी की शिकायत पर तत्कालीन अपर निदेशक ग्रेड-दो ने इसे सौंपा था। तब से कई माह बीत गए, जांच लंबित है। पहले जांच मुख्य कोषाधिकारी की शिकायत पर तो दूसरी ‘नंदिनी समृद्धि कृषक योजना में ऋण स्वीकृत नहीं खाते में दे दिया अनुदान। जांच में चौंकाने वाली जानकारी यह भी सामने आयी है। इस योजना में मवई ब्लाक के सैदपुर निवासी दिनेशकुमार की ऋण पत्रावली का अनुमोदन सिर्फ मुख्य विकास अधिकारी से लिया गया। हरिंग्टनगंज के मुबारकपुर के सूर्यप्रकाश व पूराबाजार ब्लाक शिवकुमार वर्मा को बिना बैंक से ऋण स्वीकृत हुए अनुदान की धनराशि 15 लाख 62 हजार 500 रुपये उनके बैंक एकाउंट में तत्कालीन सीवीओ जगदीश सिंह ने सेवानिवृत्त होने से दो दिन पहले 28 जून 2024 को भेज दी थी। परियोजना की लागत 31 लाख 25 हजार रुपये में 50 प्रतिशत अनुदान है।
अनुदान धनराशि का यह गड़बड़झाला वर्ष 2023-24 का है।
जांच अधिकारी डा०शुक्ल ने बताया कि जल्द ही वह आरोपपत्र संबंधित लिपिक को जारी करेंगे। जवाब आने के बाद वह अपर निदेशक ग्रेड-दो को आख्या सौंप देंगे। जांच का आदेश हो जाने से बड़ी कार्रवाई का संकेत कर्मचारी देने लगे हैं। आरोप है कि जिस शिवम श्रीवास्तव को वित्तीय पटल का प्रभार सौंपा गया। वह कार्यालय में सबसे कनिष्ठ हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) ने वरिष्ठता की अनदेखी कर उन्हे प्रभार सौंप दिया। जो सीवीओ बिना ऋण स्वीकृति के अनुदान देने की चपेट में आए हैं, उनको सेवानिवृत्त हुए आठ महीने हो गये। चर्चा है कि उन तीन में से एक लाभार्थी सैदपुर, मवई दिनेश कुमार ने सीवीओ के दो दिन बाद सेवानिवृत्त होने पर अनुदान धनराशि की एफडी करा ली। अनुदान राशि देने के लिए मुख्य विकास अधिकारी से इसी की पत्रावली पर अनुमोदन मिला है। विभाग ने जब उसके विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी तो एफडी को तोड़वा कर परियोजना स्थापित करने के लिए तालमेल बिठाया, तब जाकर वह विभागीय कार्रवाई की जद में आने से बच गया।

