मुश्ताक अहमद/इमरान अहमद
गोंडा।बृहस्पतिवार की शाम को जैसे ही आसमान पर चांद नमूदार हुआ,मस्जिदें और कब्रिस्तान इबादत और दुआओं की रोशनी से रोशन हो रहा। गुनाहों से मगफरत की रात शब-ए-बरात को नमाज़-ए-मगरिब से लेकर शुक्रवार की सुबह तक इबादतों का दौर चलता रहा। कब्रिस्तानों में सबने अपने सगे संबंधियों और रिश्तेदारों की कब्र पर जाकर फातिहा पढ़ा और अपनों के लिए दुआएं मांगी। हर एक कब्रिस्तान की हर एक कब्र को मोमबत्ती से ऐसा रोशन किया गया कि दुनिया से कूच कर गए लोगों की रुहें रोशन हो गई।सबे बारात के मौके पर मनकापुर के भिटौरा में बाबा फूल इब्राहिम शाह के मज़ार पर ज़स्ने ईद मिलादुन्नबी प्रोग्राम का आयोजन किया गया,जिसमे दूर दराज़ से आए नातखां ने नातें पढ़ी व बरेली से आए मुफ़्ती फ़ुरकान मंजरी ने सबे बारात की फ़ज़ीलत बयां की।

मुफ़्ती फ़ुरकान मंजरी ने अपनी तकरीर में नबी की सुन्नतों पर अमल करने,अल्लाह को याद रखने और इंसानियत के रास्ते पर चलने की व माँ बाप की खिदमत करने की लोगों को सलाह दी।वहीं शायर नाज़िम अज्मेरी ने अपने नाते कलाम से महफ़िल में शमां बाँधा।इस्लाम अनुयायियों की तारीख में सबसे अहम तारीख में शुमार शब-ए-बरात पर पर देश में हर जगह मस्जिदों और कब्रिस्तानों में दुआएं मांगी गई। पवित्र ग्रंथ कुरान की तिलावत के साथ-साथ मस्जिदों में नफली नमाज-ए-भी अदा की गई।

बृहस्पतिवार की रात इबादत का ऐसा मंजर पेश आया जिसने खुदा की बारगाह में मगफरत के लिए उठाए गए हाथों की दुआओं को मानों कबूल करा लिया हो। वहीं वज़ीरगंज के मौलाना हामिद रजा व मौलाना जाहिद अली नूरी के मुताबिक शब-ए-बरात की रात खुदा के हुक्म से फरिश्ते जमीं पर आते हैं और इबादत गुजार लोगों की दुआएं बटोरकर आसमान पर ले जाते हैं।

इस रात हर एक की दुआ कबूल होती है और उसकी मगफिरत का रास्ता कायम होता है।मौलाना जाहिद अली नूरी कहते हैं कि हर मोमिन का आमालनामा अल्लाह के सामने पेश किया जाता है और पूरे साल के रिज्क का इंतजाम भी होता है।

इसी तरह देश भर के सभी मस्जिदों में पूरी रात इबादत हुई और लोग सजदे में जाकर रो-रो कर अल्लाह से मगफिरत की दुआएं मांगी।इस मौके पर जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुनव्वर खान,मौलवी युसुफ,नौशाद खान,गुलाम रसूल,अकबाल अहमद,अफजाल,शमीम,सलीम,हाफ़िज़ रिजवान,फ़ैज़,शाहीद,कैफ सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

