GONDA:भारत एक कृषि प्रधान देश है। जहां कृषि देश की जीवन रेखा है। वहीं मत्स्य पालन कृषि का अभिन्न अंग है। भारत दुनिया का दूसरा सर्वाधिक मछली उत्पादन करने वाला देश है। भारत में वित्तीय वर्ष 2022-023 में 175.45 लाख टन मछली उत्पादन किया है, जो कि विश्व के कुल उत्पादन का आठ प्रतिशत है। मत्स्य पालन में देश के प्रगति की असीम संभावनाएं छूपी हुई हैं। भारत की लगभग 14 मिलियन जनसंख्या मात्स्यिकी पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निर्भर है। मत्स्य पालन किसानों के लिए जहां मुनाफे का बेहतर जरिया है, वहीं पोषण की दृष्टि से संतुलित आहार भी है। मछली में ओमेगा थ्री फैटी एसिड पाया जाता है। जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
मात्यिसकी महाविद्यालय,केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय(इंफाल) वेस्ट त्रिपूरा के अजय कुमार के अनुसार……
मछली पालन में कुछ महत्वपूर्ण विंदुओं पर ध्यान देकर मुनाफे को बढ़ा सकते हैं
मछली पालन में सर्वाधिक लागत तालाब निर्माण मत्स्य आहार तथा रोग प्रवंधन में लगता है। ऐसे में किसानों को तालाब निर्माण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, यूपी मत्स्य संपदा योजना तथा यूपी निषाद राज नाव सब्सिडी योजना, नाव खरीदने के लिए दी जा रही है।अब मत्स्य पालक किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ उठा सकते हैं। जिसमें किफायती दरों पर कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। जिससे मत्स्य पालक कर्ज का प्रयोग कर मत्स्य पालन में आगे बढ़ सकते हैं। तालाब निर्माण तथा जीरा संचय के उपरांत मत्स्य आहार उपलब्ध कराना कृषिकों को एक चुनौती होती है। जिसमें कृषिक विभिन्न व्यावसायिक आहार को भारी मूल्य पर खरीद कर मछलियों को खिलाते हैं। ऐसे में आहार लागत को कम करने के लिए किसानों को देशी मछली पालन में वोलफिया एक बेहतर विकल्प बन सकता है। जिसका पोषण मूल्य अधिक तो है ही साथ ही साथ पर्यावरण के लिए अनुकूल भी है। वोलफिया का प्रयोग कर अस्सी प्रतिशत आहार लागत घटाई जा सकती है। मछलियां प्राकृतिक आहार को चाव से खाती हैं। तथा उनका वृद्धि विकास भी तेजी से होता है। हम तालाब में प्राकृतिक प्लक्को (फाइटो प्लांक्टन और जूं प्लांक्टन) को बढ़ाने के लिए गोबर, राइस पालिस, ईस्ट, गुड़ को जल के साथ उचित अनुपात में मिलाकर सड़ाने के उपरांत तालाब के ऊपर छिड़क सकते हैं। जिससे प्राकृतिक आहार की मात्रा तालाब में बढ़ जाती है। इस प्रकार लागत में कमी कर मुनाफे को बढ़ाया जा सकता है। संतुलित आहार के साथ-साथ मछलियों का रोग प्रवंधन एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
▶रोगों से बचने के लिए महत्वपूर्ण उपाय
▶तालाब में समय-समय पर चूने का प्रयोग करना चाहिए।
▶तालाब में प्रतिमाह जाल चलाना चाहिए।
▶तालाब की तली में कचरा व गाद नहीं जमा होने देना चाहिए।
▶तालाब में ताजा पानी समय-समय पर मिलाते रहना चाहिए।
▶तालाब में आक्सीजन की मात्रा संतुलित रखने के लिए एयरेटर का प्रयोग करना चाहिए।
बायो सिक्योरिटी के नियमों का पालन करना चाहिए।
जीरा संचय के समय उपयुक्त तथा स्वस्थ अंगुलकांओ का चयन करना चाहिए, तथा पोटैशियम परमैगनेट के घोल में डिप करने के उपरांत संचय करना चाहिए।
मत्स्य कृषकों की आय दोगुनी करने के लिए ऊपर लिखित विंदुओं को समाहित करते हुए आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग और मूल्य संवर्धन को अपनाने की आवश्यकता है। सामुहिक प्रयास और नीति निर्माण के माध्यम से मत्स्य पालन को एक लाभकारी व्यवसाय बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त किया जा सकता है।

