मुश्ताक अहमद
गोंडा।लालच की हवस में अपने कैसे अंधे होते हैं वहीं रिश्तों को दरकिनार कर देते हैं। जब ऐसे लालची लोग फायदा और नुकसान की माप करने लगता है तब ये पवित्र रिश्ते नाते बेमानी लगने लगते हैं।
ऐसा ही मामला मेडिकल कालेज अस्पताल के आइसोलेशन विभाग में भर्ती मरीज राजकुमार उर्फ राजू मिश्रा 51 वर्ष पुत्र सूर्यपाल मिश्रा निवासी पांडे पुरवा थाना परसपुर,कामता तिवारी 70 पुत्र पृथ्वीनाथ तिवारी निवासी मझारा वजीरगंज व समुंदरा देवी 60 जिला जमतिया भागलपुर बिहार का प्रकाश में आया है।
06 अगस्त मंगलवार को आइसोलेशन विभाग में भर्ती तीन लावारिश मरीजों के संबंध में जानकारी की गई।जो सच्चाई निकल कर सामने आई उसने मानवता और रिश्तों के बंधन को तार-तार कर लालच की उस प्राकाष्ठा को पार कर दिया जिसके बाद सारे रिश्ते नाते बेमतलब हो जाते है। लावारिश हालत में इलाज करा रहे इन मरीजों की आंखों में अपनों से दूर रहने का गम और वापस अपने घर लौटने की आस अभी बाकी है। जब उनसे सवाल किया गया कि अस्पताल कैसे पहुंचे और लावारिश में क्यों भर्ती हुए, तो जो कड़वा सच निकल कर सामने आया वो कलेजे को चाक कर देने वाला है।
परसपुर के राजकुमार उर्फ राजू ने बायो से पोस्ट ग्रेजुएट कर रखा है। पांडे पुरवा में वह सनातन राम जानकी मंदिर ट्रस्ट का पुजारी है, उसकी पत्नी का देहांत हो चुका है। उसकी एक बेटी है। उसे सांस की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया है।डेढ़ बीघा जमीन की लालच में आकर उसके सगे भाई ने उसकी बेटी को उसके रिश्तेदार के घर भेज दिया और भाई को लावारिश हालत में मेडिकल कालेज भर्ती करा कर चले गए। उसका कहना है कि भाई ने जमीन और मंदिर की गद्दी को हथियाने के लिए ऐसा किया है। एक सप्ताह बाद तबियत में सुधार होने पर उसे घर की याद सता रही है। वह अस्पताल के कर्मचारियों से घर भेजे जाने की गुहार लगा रहा है।
कामता तिवारी निवासी मंझारा का मामला इससे अलग है। कामता का इस दुनिया में एक बड़े भाई के सिवा कोई नही है। उसके पास मात्र एक विसवा जमीन मड़हा रखने भर का है। उसकी लाचारगी और बेबसी के कारण उसे घर वालों ने उसे त्याग दिया और लावारिश हालत में मेडिकल कॉलेज गोंडा में भर्ती करा कर गायब हो गए। कामता भी आने जाने वालों से घर भेजे जाने की गुहार लगाता फिर रहा है।
समुन्दरा देवी भागल पुर बिहार की रहने वाली है। वो कुछ मंद बुद्धि की है। इसी का लाभ उठाते हुए घर के लोगों ने उसे गंगा नहाने के बहाने ट्रेन में बिठा दिया और वह भटकते हुए गोंडा पहुंच गई। जीआरपी ने उसे बीमारी की हालत में मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती कराया है। वह भी अब लोगों से अपने घर भेजने की बात करते हुए रोने लगती है।
इस संबंध में अस्पताल प्रबंधक डॉक्टर अनिल कुमार वर्मा, अधीक्षक एम०डबल्यू० खान से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि पूर्व में भी कई ऐसे मरीजों को उनके घर सफलता पूर्वक भेजने में विभाग सफल रहा है। इन मरीजों को वो स्वयं उनके घर भेजना चाहते हैं, किंतु इन्हे लेने के लिए कोई आगे आने को तैयार ही नहीं है। ऐसे मरीजों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जब तक घर वाले उन्हें लेने के लिए नही आते तो इन्हे अकेले छोड़ा नहीं जा सकता। इनके घरवालों से संपर्क किया जा रहा है। जल्द ही इन्हे घर भेजने का प्रयास किया जा रहा है।

