सरकारी जमीनों पर है ‘काकस’ की नजर
रामनगरी अयोध्या में नक्शा ही नहीं जमीन की बदल दी जाती है नवैयत
मुश्ताक अहमद
गोंडा।अयोध्या में जब से राम जन्मभूमि का निर्माण कार्य शुरू हुआ और अयोध्या नगर निगम की सीमा का विस्तार भूमाफिया, राजस्व व विकास प्राधिकरण का गठजोड़ के ‘खेल’ का नया मैदान बन रहा है। अयोध्या सहित आसपास के क्षेत्र में जमीनों की खरीद फरोख्त का गोरखधंधा चमकाने के बाद अब अयोध्या नगर निगम में शामिल 41 गांवों की सरकारी बेशकीमती जमीनों पर ‘काकस’ की नजर इस तरह गड़ी हुई है। जिसके चलते नगर निगम में शामिल गांवों के लेखपाल व राजस्व निरीक्षकों के इशारे पर बेशकीमती सरकारी जमीनों पर कब्जे की कवायद की बयार बह रही है। यही ही नहीं भू-माफियाओं के साथ एक मामलें में तो तहसील कर्मियों ने जमीन की नवैयत ही बदल डाला।

यूपी लाइव टाइम 24×7 ने शुक्रवार को पवित्र नगरी अयोध्या के शहरी क्षेत्र में इस गठजोड़ की सुनियोजित खेल का खुलासा करने के बाद इन ‘काकसों’ ने अयोध्या नगर निगम में शामिल 41 गांवों की ओर हाथ-पांव फैला दिया हैं। सूत्रों की मानें तो इन गठजोड़ ने इसके लिए बकायदा तहसीलों से शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों का नजरी नक्शा निकलवा रहे हैं। किस ग्राम पंचायत में परती, तालाब, चारागाह,बंजर,ग्राम समाज और खलिहानों की कितनी जमीनें हैं इसके कागजात खंगाले जा रहे हैं। इन जमीनों पर अपना मालिकाना हक ज़माने के लिए भूमाफिया व प्राधिकरण और राजस्व के गठजोड़ ने ऐसे स्थानों पर अवैध कब्जा कर रास्ता बनाना शुरू कर दिया है। इन गांवों के लेखपालों की चांदी ही चांदी है। बताया जाता है कि राम मंदिर के पास नन्हे मियां ने 2 करोड़ रुपए में जमीन खरीदी और उसी दिन उसी जमीन का 18 करोड़ 5 लाख रुपए में बेच दिया ये महज बानगी भर है। गुरु नानक महिला विद्यालय के पास आगे नहर के किनारे स्थित एक तालाब पर तो कब्जा शुरू है, वहीं इलाहाबाद हाईवे पर एक कोल्डड्रिंक बनाने वाली फैक्ट्री के पास स्थित तालाब भी अवैध कब्जे की कवायद में है। कहा जाता है कि जिन 41 गांवों को अयोध्या नगर निगम में शामिल कर निगम के विभिन्न वार्डों में समाहित किया गया है वहां काकस के गुर्गों ने कब्जा कर सरकारी जमीनों के सर्वो तक में लगे हुए हैं। नगर निगम में शामिल होने के बाद यह गांव अब प्राधिकरण की जद में भी आ गए हैं। शहर का अंदरुनी हिस्सा वाला खेल अब इन इलाक़ों में शुरू कर दिए हैं। कई इलाकों में तो अवैध रूप से प्लाटिंग के लिए ऐसी जमीनों की पटाई, टिन व झोपड़ी रखने का काम शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो इस खेल में गोंडा जिले के तरबगंज तहसील व बीकापुर के एक नामचीन हस्तियां भी शामिल है, जो सरकारी जमीनों की हेराफेरी करने का मास्टर माइंड बताया जाता है। तहसील कर्मियों से मिलकर जमीनों की हेराफेरी के धुरंधर ने अबतक 100 से अधिक जमीनों को लेकर अपनी कानूनी बाजीगरी दिखा चुका है। इनके हाथ इतने लंबे हैं कि आजतक इन्हें कोई छू भी नहीं पाया है। ये भूमाफिया जमीनों को लेकर ऐसी हाथ की सफाई दिखाता है कि तहसील कर्मी इनकी जेब में रहते हैं।

लाल डिग्गी तालाब पर अवैध कब्जा
लाल डिग्गी तालाब पर लाखों रुपए खर्च कर सरकार सरोवर बना दिया है वह भी अवैध कब्जों से अछूती नहीं है। एक एकड़ में फैला लाल डिग्गी तालाब अवैध कब्जे आंखों से देखे जा सकते हैं। जिनमें एक निजी स्कूल, एक हास्पिटल व आवासीय निर्माण शामिल है।यही वजह है कि सिमट कर कुछ एकड़ बचे इस तालाब में सरोवर का निर्माण हुआ है। तहसील प्रशासन खुद अवैध कब्जे की बात स्वीकारता है और कार्रवाई के नाम पर चुप हो जाता है।
भू-माफियाओं के लिए तहसील कर्मियों ने बदल दी 20 करोड़ रुपए के जमीन की नवैयत
एक चौंकाने व दिल दहलाने वाला एक और खुलासा हुआ है। 20 करोड़ रुपए की चारागाह की जमीन की नवैयत भू-माफिया और तहसील अफसरों की मिली भगत से बदल दी गई है। इसकी शिकायत गनेशपुर निवासी प्रकाश गुप्ता ने की है। सीएम को भेजे गए शिकायती पत्र में लिखा है कि गाटा संख्या 446 रकबा 0.1070 चारागाह में दर्ज कागजात है। इस जमीन की नवैयत बदलने का अधिकार चकबंदी व डीएम को है। भू-माफिया को लाभ पहुंचाने के लिए भूमि श्रेणी 3 आसामी के रूप में दूसरे के नाम दर्ज कर दी गई। शिकायत कर्ता ने आरोप लगाया है कि इसके पीछे भी लंबा खेल खेला गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि पूरी कार्रवाई नियम के खिलाफ की गई है। प्रकाश गुप्ता ने सीएम को पत्र भेजकर जांच की मांग की है।
नगर निगम में शामिल गांवों की सरकारी जमीन पर अब किसी प्रकार के कब्जे की सूचना नहीं मिली है। यदि कोई भी ऐसा करता है तो तुरंत उस व्यक्ति पर कार्रवाई की जायेगी वह चाहे जितनी पहुंच वाला ही क्यों न हो।
इन्द्र भूषण यादव प्रभारी तहसीलदार,सदर तहसील अयोध्या।

