मुश्ताक अहमद
गोंडा।अगर आप किसी ऐसी समस्या से घिर गये हैं जिससे निजात पाने का रास्ता नहीं सूझ रहा तो चले आइए रौंजा दरगाह। यहां आने वाले जायरीनों का विश्वास है कि दरगाह पर आने से जिंदगी जीने का उत्साह बढ़ जाता है।

सैयद सालार रज्जब अली हटीले शाह गाजी के उस पाक दरगाह का जिकर करना चाहेंगे। जिसकी मजार पर उन्हीं की अदालत और उन्हीं का हुक्म फरमाया जाता है। बात चौंकाने वाली है। पर असलियत का नजारा वहां पहुंचे जायरीनों को देखकर लगाया जा सकता है।जहां ऐसी दुष्ट आत्माओं से पीछा छुड़ाने के लिए जरुरतमंद खुद-ब-खुद चिल्ला-चिल्ला कर जुर्म-ए-इकबाल करते हैं।
जिला मुख्यालय से 22 किमी०दूर अयोध्या-गोंडा हाईवे पर वजीरगंज विकास खंड के रौंजा गांव में यह पाक दरगाह स्थित है। जहां की नेकी जहान में सुर्खियां बिखेरती हैं। यहां कई बार नहीं एक बार ही पहुंच कर सिन्नी और चादर पोशी करके हर अकीदतमंद की मुंह-मांगी मुराद पूरी होती है।
भूत-प्रेत दुष्ट आत्माओं की साया तो पुस्त दर पुस्त उस खानदान की तरफ झांकती तक नहीं। जिसका पैर इस दरगाह की तरफ बढ़ जाता है। और आत्मा में हठीले शाह गाजी बाबा का दीदार हो जाता है।बताया जाता है कि एक बार वह मन में बस के निकलते नहीं तौ उस आत्मा में भटकाव की जगह कहां। हर साल जेठ माह के प्रथम रविवार को तो गाजी-ए-पाक की मजार पर मेले की शक्ल में जहाने हुजूम उमड़ पड़ता है। सिन्नी, चादर, नगदी, जेवरात और सुहाग के सामान से मजार शरीफ का जर्रा-जर्रा पट जाता है। यहां आने वाले हर शख्स की निगाहें उस शख्सियत को सलाम करते दिखती हैं। जो आज भी आम लोगों के अमन की दुआं और खैर मकदम की ख्वाहिशें परोसता है।
जेठ माह के प्रथम रविवार को लगती है खास अदालत
यूं तो सप्ताह के प्रत्येक रविवार और वृहस्पतिवार को गाजी की अदालत में तमाम जायरीन सलाम करते हैं। लेकिन जेठ माह के प्रथम रविवार को मेले के दिन यहां खास अदालत में भूत-प्रेत से ग्रसित हर दुखिया का ता उम्र के लिए फायदा होता है। प्रेत आत्मा चिल्ला -चिल्ला कर जायरीनों का साथ छोड़ने को विवश हो जाती है।
सुलेमान शाह गाजी से लें सलामती की दुआं
रौजा शरीफ दरगाह में पूरे साल वहां के मुजावरों द्वारा झाड़ -फूंक कर लोगों के सलामती की दुआ की जाती है जरुरतमंद यहां आते रहते हैं। सबके मन में उस सालाना उर्स का बेसब्री से इंतजार होता है। जब यहां मेला लगता है।

