परसपुर,गोण्डा।आरटीआई एक्टिविस्ट ने बेटे के साथ हुई मारपीट की प्राथमिकी दर्ज कराने थाने गये तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय दिन भर टहलाती रही। पुलिस की इस कार्य शैली को लेकर कई सामाजिक संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है। मामले की शिकायत चुनाव आयोग और जिले के पुलिस अधीक्षक से की है।
ग्राम मलांव के पूरे हठ्ठी सिंह निवासी सामाजिक कार्यकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट देवनारायण सिंह ने बताया कि अक्षय प्रताप सिंह 27 मार्च को किसी आवश्यक कार्य से घर से परसपुर बाजार जा रहा था। तभी रंजिशन तीन लोगों ने घर से तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित नहर पुलिया के पास रास्ते में उसके बेटे को लाठी डंडों से मारा-पीटा पीटा। मारपीट में उसे चोटें आईं हैं। इसके पूर्व होली के दिन भी बेटे के साथ मारपीट की गई थी। घटना की लिखित शिकायत परसपुर थाने में दी थी । इंस्पेक्टर प्रदीप शुक्ला ने उन्हें कल आने की बात कहते हुए टरका दिया। पीड़ित डीएन सिंह का कहना है कि इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट लिखने के बजाय दिन भर उनको थाने में टहलाते रहे। सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार यह मंंशा पर पुलिस विभाग के थानेदार व चौकी प्रभारी पानी फेर रहे हैं। परसपुर पुलिस पीड़ितों के साथ कम दबंगों के साथ ज्यादा खड़ी दिखाई देती है। जिससे पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ गई है। क्षेत्र के नीरज सिंह (पत्रकार ) सहित कई संगठनों व प्रबुद्ध जनों ने इंस्पेक्टर के इस कृत्य की निंदा करते हुए जिले के कप्तान विनीत जायसवाल से मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने की मांग की है।

