इमरान अहमद
मनकापुर।इस्लाम धर्म के मानने वालों के लिए शब-ए-बारात की रात फजीलत और इबादत की रात होती है,जिसमें मुसलमान अल्लाह से अपनी गुनाहों की मांगी मांगते हैं।शब-ए-बारात में हर मुसलमान पूरी रात जागकर नमाज पढ़ते हैं,इबादत करते हैं,और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।इस्लाम धर्म के मानने वालों की ऐसी मान्यता है कि शब-ए-बारात के रहमत व मगफिरत की रात को जो इंसान सच्चे दिल से इबादत कर अपने सारे गुनाहों (पापों) की माफ़ी माँगे तो अल्लाह उसके सारे गुनाहों को माफ कर देता है।
इस्लाम के मानने वालों के लिए ये बहुत अहम दिन है।इसे शब-ए-बारात के नाम से जाना जाता है।इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक हर साल शब-ए-बारात शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात को मनाया जाता है। इस दिन खास नमाज भी पढ़ी जाती है।मुसलमान इस पाक रात में सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करते हैं।उसके सामने अपने गुनाहों से तौबा करता है,तो अल्लाह उसे माफ फरमा देता है।यही वजह है कि मुस्लिम लोग इस रात की खास तैयारियां करते हैं।मुस्लिम इस दिन इबादत के साथ जो लोग अल्लाह को प्यारे हो चुके हैं (मर चुके हो)उनकी कब्र पर जाकर उनकी निजात के लिए दुआ करते हैं।और उनकी कब्रों पर फूल चढ़ा कर व अगरबत्ती जलाकर उनको याद करते हैं।इस दिन कब्रों पर उजाला किया जाता है।माना जाता है कि रहमत की इस रात में अल्लाह पाक कब्र के सभी मुर्दों को आजाद कर देता है।इस्लाम अनुयायियों का मानना है कि मुर्दे इस दिन अपने घर की ओर रुख करते हैं। इसीलिए इस दिन लोग अपने घरो में मीठा बनाकर वज्र वो नियाज करते हैं।
मनकापुर जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुनव्वर अली कादरी ने बताया कि हदीस के मुताबिक दुआ-ए-मगफिरत की रात में अल्लाह इंसानों के आने वाले सालों के किस्मत (भाग्य)तय करता है।इस रात अल्लाह रहमत के दरवाजे खोल देता है और हर उस शख्स को बख्श देता है जो शिर्क करने वाला न हो।इस रात में हर शख्स को कुरान की तिलावत में समय गुजारना चाहिए।अकीदतमंदों को शबे बारात के रात नफिल नमाज अदा करनी चाहिए।रोजे रखने चाहिए।रात इबादत में गुज़ार कर अल्लाह से दुनिया में(खास हिंदुस्तान)में अमन शांति की दुआ करनी चाहिए।

