उतरौला,बलरामपुर।सावन का पवित्र महीना प्रारम्भ हो रहा है। सभी महीनों में सबसे अधिक ख्यातिलब्ध सावन का यह महीना सबसे अधिक लुभावना और प्रकृति के सबसे अधिक नजदीक रहता है।मन को तृप्त करने वाले इस महीने में जंहा जलवर्षा से धरा सराबोर हो जाती है वही मानव मन भी तृप्त होकर नाचने लगता है। चारो तरफ हरियाली और नएपन से प्रकृति खुद का श्रृंगार करती है और जीव जंतुओं और प्राणियों को एक अदभुत सकून प्रदान करती है।
सावन के प्रारम्भ होने के ठीक चार दिन पहले आषाढ़ी एकादशी होती है जिसका हिन्दू धर्म ने खास महत्व है। मान्यता है कि उसी दिन सम्पूर्ण सृष्टि का ख्याल रखने वाले भगवान विष्णु संसार की बागडोर भगवान भोलेनाथ को सौप करके खुद क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते है। ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की प्रार्थना से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं ।
भगवान भोलेनाथ का खास और पवित्र महीना सावन का महीना है।इस माह का हर सोमवार अपने आप में हर-हर महादेव का नाद करता हुआ भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। सावन माह का प्रत्येक सोमवार एक व्रत और त्योहार के रूप में मनाया जाता है। कभी-कभी सावन माह में पांच सोमवार आते हैं, जिसमें शिव भक्त बड़े श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और जगत कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।
सावन के पवित्र महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के रूप में मनाई जाती है । ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान सभी की मनोकामना पूर्ण करते हैं । जहां एक तरफ हम वसुदेव कुटुंबकम , प्राणियों में सदभावना और जगत कल्याण को भारतीय संस्कृति प्राणतत्व समझते है वहीं दूसरी तरफ जीव जंतुओं की पूजा भी भारतीय संस्कृति और परंपराओं में विधि विधान से की जाती है । सावन के पवित्र महीने में नाग पंचमी का त्यौहार आता है जिसमें सांपों को दूध पिलाकर उनकी पूजा की जाती है । नाग देवता को भगवान शिव का ही रूप माना जाता है । भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विष के निकलने पर पूरी सृष्टि में जब हाहाकार मच गया तब उन्होंने गरल को अपने गले में रोक लिया क्योंकि जहर अंदर जाता तो उससे खुद का नुकसान होता और बाहर रह जाता तो सृष्टि का विनाश तय था लेकिन उन्होंने जगत कल्याण को महत्व देते हुए विषपान किया और गले मे जहर को रोक दिया, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है । सावन के महीने में हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जाता है हरियाली तीज जहां एक तरफ सुहागिनी महिलाओ के प्रेम को प्रदर्शित करती है वहीं दूसरी तरफ जीवन में हमेशा समृद्धि और हरियाली बनी रहे इसका भी द्योतक है । दूसरी तरफ इसी माह में भाई बहन के अनूठे प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार भी आता है जो आपसी प्रेम और सद्भावना का त्यौहार है । इस तरह से देखा जाए तो हमारी भारतीय और सनातन आस्था में सावन का महीना सबसे पवित्र और खास महीना है जहां पर्यावरण में चारों तरफ हरियाली दिखाई देती है वहीं दूसरी तरफ श्रद्धा और आस्था का भाव भी दिखाई देता है । भगवान भोलेनाथ का जयकारा लगाते हुए निकले हुए श्रद्धालु जल लेकर भगवान भोलेनाथ को समर्पित करने के लिए श्रद्धा और आस्था के पथ पर चलते हुए उन्हें कभी भी कष्ट और पीड़ा का अनुभव नहीं करते है यह इस बात का भी प्रतीक है हम अपने कर्तव्य पथ पर नेकी को मंजिल मानकर चलते है तो जीवन के तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं ।

