गोण्डा।मुस्लिम मजलिस व असगर गोण्डवीं फाउंडेशन के तत्वावधान में शायर मुनव्वर राणा व मो मुस्तकीम को लेकर महमूद अली आकिफ़ एडवोकेट और आतिफ़ गोंडवी ने आवास पर एक शोकसभा का आयोजन कर खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मशहूर शाइर मुनव्वर राना और आल इंडिया मुस्लिम मजलिस के प्रदेश अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी के पिता हाजी मुस्तक़ीम सिद्दीक़ी की याद में खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया। जिसमें मुस्लिम मजलिस के ज़िला अध्यक्ष आकिफ़ एडवोकेट ने बताया कि स्वर्गीय मुस्तक़ीम सिद्दीकी ख़ुश अख़लाक़ और बहुत ही मिलनसार इंसान थे। कलकत्ता पुलिस से 1987 में ईमानदारी से अपनी सेवा करते हुए रिटायर्ड हुए। उन्होंने बताया कि उनके तीन बेटे और दो बेटियाँ थी। बेटे के निधन से आपको गहरा सदमा पहुँचा और ख़ुद भी बीमार पड़ गए। बीमारी के कारण 16 जनवरी 2024 को उनका निधन हो गया, उन्हें उनके आबाई वतन अटकोली ज़िला सुल्तानपुर में सुपुर्दे खाक किया गया।
बुज़ुर्ग शायर जमील आज़मी ने बताया कि उनका और मुनव्वर राना का साथ कई मुशायरों में रहा। राना साहब अपने शुरुआती दौर में रिवायत की ग़ज़लें कहते थे। लेकिन कुछ अरसे बाद आपका मिज़ाज बदला और बहुत ही आसान भाषा में समाज के हर पहलू को अपनी शायरी के ज़रिए आईना किया। यही वजह थी कि राना खवास और अवाम में मक़बूल थे। अफसर हसन ने कहा कि भविष्य में कोई कितना भी क़ाबिल शाइर क्यों न बन जाए लेकिन मुनव्वर साहब की जगह नहीं ले सकता। राना साहब के माँ पर कहे गए शेरों की बदौलत समाज ने माँ की अज़मत को और भी अच्छे से जाना और समझा। अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि राना साहब की शाइरी सूरज की तरह उजाला फैलाती रहेगी। जमशेद वारसी ने मुनव्वर राना का कलाम ‘मुहाजिरनामा’ के कुछ अशआर पढ़े। मुजीब अहमद, आतिफ़ गोंडवी और अल्हाज गोंडवी ने राना साहब की शख़्सियत और शाइरी के हवाले से अपने अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर मोहम्मद जुनैद, मोहम्मद इसराइल बाबू भाई , हाफ़िज़ सलाहुद्दीन, हाकिम,सगीर कुरैशी, अब्दुल हफ़ीज़ खान.सादिक़ वग़ैरह मौजूद रहे।

