इक़बाल शाह
गोण्डा।रमजान-उल-मुबारक इस्लामिक कैलेंडर के नवें महीने की शुरुआत होने को है। ऐसे में उसकी तैयारियों को लेकर हर एक मुसलमान पुर जोर से लग गया है। रहमतों व बरकतों के इस महीने में अल्लाह की रहमत पूरे महीने बरसने वाली है। हर नेकी के बदले 70 गुना सवाब के साथ हर एक मुसलमान का दिन जहां रोज़े व इबादत में गुजरेगा तो वहीं रातें तरावीह की नमाजो में बीतेगा।

इस्लाम धर्म के पांच अरकानों में से एक है रमज़ान-उल-मुबारक के रोज़े। इस महीने में अल्लाह शैतान को कैद कर देता है। जिससे की वह लोगों की इबादत में खलल पैदा न कर सकें। रमज़ान-उल-मुबारक के महीने को बस चंद रोज बचे है। सोमवार को चांद की तस्दीक होते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ व रोज़े रखने का दौर शुरू हो जाएगा। ऐसे में हर एक मुसलमान उसकी तैयारियों में जुट गया है।

बताया जाता है कि यदि 10 मार्च को चांद की तस्दीक होती है तो 11 मार्च से रोज़ा शुरू हो जाएगा। नहीं तो 12 मार्च से रोज़ा शुरू होना तय है। जिसको लेकर शहर से लेकर गांव कस्बों में तैयारियां जोरों से शुरू हो गई है। हर कोई रमजान से जुड़ी चीजों की खरीद फरोख्त में लगा हुआ है। वहीं घरों व मस्जिदों में साफ सफाई का दौर चल रहा है।
बड़ी फजीलत है इस माह-ए-रमज़ान में
उलेमाओं के अनुसार रमज़ान के रोज़े में सहरी से इफ्तार होने के बीच में खाने पीने व जिस्मानी व अंदुरुनी ख्वाहिशातों को दूर रखना होता है। इस्लामिक कैलेंडर के इस नवें महीने की बड़ी फजीलत बताई गई है। बताया जाता है कि इसी महीने में अल्लाह ने अपने प्यारे नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स.) पर कुरआन नाजिल फरमाया। रमजान के इसी महीने में एक ऐसी रात का जिक्र किया गया है। जिसमें अल्लाह का बंदा पूरी रात जाग इबादत में गुजारते हुए अपने गुनाहों की तौबा करता है। जो कि अल्लाह उसकी दुआओं को कुबूल कर उसके सारे गुनाहों को मांफ कर देता है।
तीन असरों में बांटा गया है इस महीने को
रमजान-उल-मुबारक के इस महीने में तीन असरे होते है।जिसमे हर एक असरा दस दिनों का है।बताया जाता है कि रमजान का पहला असरा रहमत व बरकतों का है।दूसरा गुनाहों से मगफिरत व तीसरा जहन्नुम से खलासी का बताया गया है।

