मुश्ताक अहमद
गोंडा।मौजूदा समय में ठंड से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। तापमान में गिरावट से शरीर में खून की नसें सिकुड़ रही हैं। संकरी नसों में रक्त के प्रवाह के लिए हृदय को अधिक जोर लगाना पड़ रहा है,जिससे बीपी बढ़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वजीरगंज में सिरदर्द,दिल की धड़कन बढ़ने,घबराहट और सांस फूलने जैसे लक्षणों वाले मरीज उपचार को पहुंच रहे हैं।
इस कड़ाके की ठंड में अस्पतालों की ओपीडी में सामान्य दिनों की तुलना में बीपी के मरीज बढ़े हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वजीरगंज के चिकित्सक डा० सत्येन्द्र सिंह ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में इस समय ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ गई है,जो पहले से बीपी के मरीज हैं।
ऐसे मरीज विशेष सावधानी बरतें
हर दिन बीपी चेक करते रहे। दवाएं समय से लें। ठंड में जिस तरह से प्लास्टिक की नली सिकुड़ जाती है ठीक वैसे ही शरीर के अंदर खून की नसों में सिकुड़न हो जाती है। जिससे रक्त प्रवाह के लिए दिल को अधिक जोर लगाना पड़ता है और बीपी बढ़ जाती है।
बीपी बढ़ने से दिल, दिमाग, गुर्दे और फेफड़े सभी प्रभावित होते हैं। हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामले इन दिनों इसी वजह से बढ़ रहे हैं।
बचाव के उपाय
सीधे ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचें। गर्म कपड़े पहनें। सिर-कान को ढककर रखें।
सुबह-शाम खुले वातावरण में टहलने न जाएं । घर के अंदर योगा-प्राणायाम करें।
बीपी के मरीज अपनी दवाएं समय से लें। डिजिटल मशीन से नियमित बीपी की जांच करें।
नमक का सेवन कम करें। मौसमी फल और सब्जियां, जैसे मेथी, बथुआ, गाजर का सेवन करें।
गर्म सूप और गुनगुना पानी पिएं। शाम को सोने से पहले भाप लेना भी लाभदायक है।
आहार का रखें विशेष ध्यान
चिकित्सक डा० सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि सर्दी के मौसम में लोगों की भूख बढ़ जाती है, कारण कि ठंड के प्रभाव से निपटने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता अधिक होती है। गुड़, दूध, सूखे मेवे के उत्पादों जैसे गजक, लड्डू, मिठाई का सेवन करें।
घी के साथ बाजरा,जौ या ज्वार की चपाती फायदेमंद होती है। मौजूदा समय में भारी दालें जैसे काला चना, छोले, राजमा, उड़द पचने योग्य होती हैं। दिन की शुरुआत दो गिलास गुनगुना पानी पीकर करेंं।
रात को एक गिलास दूध पिएं। मौसमी सब्जियों का गरमा गरम सूप पी सकते हैं। मेथी, बथुआ, मूली, सरसों, चना मटर के साग एवं इनसे बने पराठे का सेवन करें। पेट साफ रहता है और आवश्यक ऊर्जा मिलती है। ठंड में खाली पेट न रहेंं। ये बीमार कर सकता है। नमक की मात्रा सीमित रखें।

