इमरान अहमद
गोंडा।बृहस्पतिवार की रात जैसे ही आसमान पर चांद नमूदार हुआ,मस्जिदों और घरों में इबादत और दुआओं की रोशनी से रोशन हो गया।गुनाहों से मगफरत की रात लैलतुलकद्र को नमाज़-ए-मगरिब बाद से लेकर शुक्रवार की सुबह तक इबादतों का दौर चलता रहा। घरों में सबने अपने गुनाहों से निजात और अल्लाह को राजी करने के नफिल नमाज, कुरान की तिलावत के साथ फातिहा पढ़ा और दुआएं मांगी। हर एक घर अल्लाह की इबादत और कुरान की तिलावत से ऐसा रोशन किया गया कि उनका दिल रोशन हो गया।
मुख्तार-ए-कायनात है जो चाहे मांग ले, मेरा नबी हयात है, जो चाहे मांग ले। इस्लाम अनुयायियों की तारीख में सबसे अहम तारीख में लैलतुलकद्र के मौके पर देश में हर जगह मस्जिदों और घरों में दुआएं मांगी गई। पवित्र ग्रंथ कुरान की तिलावत के साथ-साथ नफली नमाज भी अदा की गई। पूरे देश में घरों और मस्जिदों में गुरुवार की रात इबादत का ऐसा मंजर पेश आया जिसने खुदा की बारगाह में मगफरत के लिए उठाए गए हाथों की दुआओं को मानों कबूल करा लिया हो। मनकापुर में जामा मस्जिद को झालरों से रोशन किया गया था,मस्जिद में मुस्लमान रात भर जग कर इबादत करते रहे।मौलाना हामिद रजा व मौलाना जाहिद अली नूरी के मुताबिक लैलतुलकद्र की रात खुदा के हुक्म से फरिश्ते जमीं पर आते हैं और इबादत गुजार लोगों की दुआएं बटोरकर आसमान पर ले जाते हैं। इस रात हर एक की दुआ कबूल होती है और उसकी मगफरत का रास्ता कायम होता है। मौलाना जाहिद अली नूरी कहते हैं कि हर मोमिन का आमालनामा अल्लाह के सामने पेश किया जाता है और पूरे साल के रिज्क का इंतजाम भी होता है।देश की सभी मस्जिदों में पूरी रात इबादत हुई और लोग सजदे में जाकर रो-रो कर अल्लाह से मगफरत की दुआएं मांगी।

