प्रयास:पवित्र नगरी अयोध्या और नेपाल तक जा पहुंची गांव खीरीडीह के फूलों की महक,50 लोगों को रोजगार
मुश्ताक अहमद
गोंडा।पवित्र नगरी अयोध्या से लगा वजीरगंज, जिसका छोटा सा गांव खीरीडीह आज फूलों से गुलजार है। खीरीडीह के फूलों की महक राम नगरी अयोध्या और पड़ोसी मुल्क नेपाल तक पहुंची है। महज एक बीघा से शुरू की गई फूलों की खेती से राहुल आज 50 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

राहुल ने महज एक बीघा खेत पर फूलों की खेती शुरू की थी। आज दो एकड़ जमीन पर राहुल गुलाब, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस जैसे फूलों की खेती कर रहे हैं। पाली हाउस में फूलों की खेती कर रहे हैं। पाली हाउस में फूलों की खेती कर रहे राहुल इस इलाके के फूलों का निर्यातक बना चुके हैं। वे स्वयं अब तक एक दर्जन से अधिक किसानों को इस खेती के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
फूलों की खेती के माध्यम से अपनी माली हालत सुधारने के साथ ही वे 50 लोगों को रोजगार देकर उनके परिवार को भी आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम कर रहे हैं।
कहते हैं कि हिम्मतें मर्दा मदद-ए-खुदा, शुरुआती दौर में राहुल ने खेत में उगाए फूलों को रामनगरी में सड़क किनारे बुकें बनाकर बेचना शुरू किया। इसके लिए वे पूसा से फूलों के बीज लाते और खेतों में बुआई कर पालीहाउस बनाकर खेती किया करते। पारंपरिक खेती के मुकाबले जब फूलों की खेती से करीब दस गुना फायदा हुआ तब लगन लग गई कि बस अब इसी दिशा में आगे बढ़ना है। धीरे-धीरे उन्होंने रजनीगंधा, गुलदाऊदी, ग्लेडियोलस और गुलाब की खेती शुरू कर दी। आज आलम यह है कि पवित्र नगरी अयोध्या और पड़ोसी मुल्क नेपाल सहित पूर्वांचल के व्यवसाई यहां से फूल ले जाते हैं।
राहुल ने बताया कि आज सरकार पालीहाउस बनाने पर सब्सिडी भी दे रही है। एक एकड़ में तीस हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। गुलाब के पौधे में पहले साल में 30 और दूसरे साल 36 फूल आ जाते हैं। जब विदेश से खरीदार आते हैं तो एक फूल बीस रुपए तक भी बिक जाता है। यह फूल बाजार में औसतन दस रुपए का बिकता है। राहुल बताते हैं कि फूल में सिर्फ दो ही बीमारियां होती हैं। एक फंगस और एक कीट लगने की। इन बीमारियों की पहचान और उपचार आसान है।
राहुल ने बताया कि गुलाब के पौधे सात से आठ रुपए प्रति नग मिलते हैं। यह गुलाब बेहद खास होता है। इसे पुणे से मंगाया जाता है। यह पौधा ज्यादा से ज्यादा फूल देने के लिए जाना जाता है। इन पौधों को पालीहाउस में तैयार खेत में लगाया जाता है। शुरू में पौधों का ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। बाद में समस्या नहीं आती है। पौधों में पानी देने के लिए डिप सिस्टम लगाया गया है।
सड़क किनारे से विदेश तक
राहुल राम नगरी में सड़क किनारे फूल बेचा करते थे। आज राहुल के बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं। साधारण से दिखने वाले किसान राहुल बताते हैं कि जब फूलों की खेती शुरू की थी, तब माली हालात अच्छे नहीं थे। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। फूलों की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को चार चांद लगा दिए हैं। वह कहते हैं कि किसान को अपनी पारंपरिक खेती से आगे बढ़ना पड़ेगा। ऐसा करने से उसकी आय दोगुनी नहीं, दस गुनी तक हो जायेगी।

