मुश्ताक अहमद
गोंडा।पवित्र माह रमजान व ईद के मुबारक मौके पर ख्यातिलब्ध व्यंजन सेंवई की बात न हो तो ईद की मिठास पूरी नहीं होती। पवित्र माह रमजान व ईद के मौके पर साल के ग्यारह माह अन्य कार्य करने वाले सेंवई के कारीगर भी सेंवई बनाकर भाईचारे और शांति का पैगाम देते हैं।
गोंडा जिले के वजीरगंज से रमजान के पूरे एक माह तक सेंवई और लच्छे की सप्लाई समूचे जनपद में होती है। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि पूरे रमजान व विशेष कर ईद के दिन घर-घर बनने वाली सेवाइयों के जायकेदार व स्वादिष्टता को हद तक पहुंचाने में लगे इन कारीगरों को साल के 11 महीने इंतजार करने के उपरांत इस पवित्र महीने से जो आत्मीय लगाव होता है। वो इनके बातों से साफ जाहिर होता है। जिले में अधिकांशतः इन्हीं के हाथों बनाई और भूंजी गई सेंवइयां मुस्लिमों के घर पकने के बाद लोग मेहमानों को परोसने के बाद स्वयं भी खाकर लुत्फअंदोज होते हैं। संजय गुप्ता के कारखाने में कार्य कर रहे शिवराज ने बताया कि सेंवई बनाने का कार्य उनका खानदानी पेशा है। पिछले तीन दशक से उनके पूर्वज इस कार्य को अंजाम देते आए हैं। कारखाने पर तपती भट्ठी पर चढ़ी भारी-भरकम कढ़ाहे में खौलते डालडे के समक्ष बैठे बब्लू ने बताया कि हम लोग स्वयं पिछले पांच-छह सालों से वजीरगंज इसी कारखाने पर रमजान के माह में आकर सेवईयां बनाते हैं।
बब्लू ने कहा हम लोग इस कार्य को नेक मानकर पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं। हमारी कोशिश होती है कि हमारी भट्ठी व कढ़ाहे से निकलने वाली सेंवई व लच्छे में कोई कोर कसर बाकी न रहे। सेंवई बनाने के लिए मैदा,डालडा आदि के मिश्रण में लगे पूरी तल्लीनता से नीरज ने बताया कि 11 महीने दूसरा काम करते हैं। किंतु इस एक माह रमजान में सारा काम छोड़कर यहां आ जाते हैं। पिछले पांच-छह सालों से लगातार यहां आकर इस कार्य को करते हैं। रमजान माह में यदि यह कार्य हम न करें तो ऐसा लगता है कि कि मानों हम पूरा साल व्यर्थ में गवां दिया। सेंवई को लच्छे में तब्दील करने में माहिर राहुल ने बताया कि रमजान में यहां आकर सेंवइयां लच्छे आदि बनाकर अपने को धन्य समझते हैं। इसी तरह कारखाने पर अन्य दूसरे कार्यों में लगे अशोक कुमार शुक्ला व राम लौटन ने कहा कि पिछले तीन दशक से इस कार्य को अंजाम देने वाले हमारे पूर्वजों ने इस कार्य को न छोड़ने की नसीहत दी थी। यही वजह है कि हम लोगों ने कानपुर की हठिया खोया मंडी से इस कार्य को सीखा। और पिछले 5-6 सालों से पवित्र माह रमजान में अपने सारे कार्य को छोड़कर यहां सेंवइयां बनाते हैं।
कारखाने के मालिक संजय गुप्ता ने कहा कि सेंवई लच्छे बनाने का कार्य हमारा खानदानी पेशा नहीं है। एक बार इस कार्य को शुरू करने में हमें इन कारीगरों का बड़ा सहयोग मिला तब से लेकर आज तक इन लोगों का प्यार और सहयोग हमें इतना मिला कि न चाहकर भी हम इनके खातिर रमजान माह में सेंवई लच्छे बनाने का कार्य शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान माह शुरू होने से एक सप्ताह पूर्व ये कारीगर सेंवई बनाने की व्यवस्था में जुट जाते हैं। मेरा काम सिर्फ इन लोगों को सेंवई और लच्छे बनाने की सामग्री उपलब्ध कराना रहता है। बाकी सारी जिम्मेदारी को ये लोग इस तरह निभाते हैं कि मानों यह इनके स्वयं धार्मिक त्योहारों का व्यंजन हो तथा इनका स्वयं का कारखाना हो।

