मुश्ताक अहमद
गोंडा।जैसे-जैसे गर्मी की तपिश बढ़ रही है। अग्निदेव का सितम गरीबों पर कहर बनकर टूट रहा है। मौसम का मिजाज बदलने के साथ लोगों की धुकधुकी भी तेज हो गई है। वजह यह है कि यदि एक चिंगारी भड़क गई और वह लपटों का रुप ले लिया तो ऐसे में बचाव करना भी मुश्किल हो जा रहा है। कर पतवार आदि से बने फूस के घर,छप्पर जलने व गृहस्थी राख होने की घटनाएं शुरू हो चुकी हैं।
ऐसे में गंभीर सवाल है कि मार्च, अप्रैल, मई, जून माह में प्रशासन व अग्निशमन विभाग इन संकटों से कैसे निपटेगा। ऐसी घटनाएं अब शुरू हो चुकी हैं। लेकिन आग पर काबू पाने के लिए संसाधन आड़े आ रहे हैं। आलम यह है कि संसाधन सीमित हैं और खतरे पहाड़ जैसे ऊंचे। लोगों को खौफजदा होना स्वाभाविक है।
जिले की 1054 से अधिक ग्राम पंचायतों में तीन नगर पालिका परिषद व पांच नगर पंचायत क्षेत्रों में अग्निनकांड के हादसों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी जिस विभाग पर है वह खुद ही सहमा हुआ है। मकान, प्रतिष्ठान व कल कारखानों की संख्या बढ़ी है। इस तरक्की के अनुरूप संसाधन नहीं बढ़े हैं। प्रचंड गर्मी में जब आग का ताण्डव शुरू होता है तो वह किसी महामारी की तरह विकराल बन जाता है। देखते ही देखते घर के घर व गांव के गांव एक ही लपट में खाक हो जाते हैं। तरबगंज व करनैलगंज क्षेत्र में विभाग के पास जिला प्रशासन आज जो संसाधन के मानक हैं वह दशकों तक अग्निशमन केंद्र पुराने हैं। जबकि कच्चे, पक्के मकान बनाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करा सका। फिलहाल यहां सदर के उधारी संसाधनों से काम चलाने की योजना है।
नवाबगंज में वर्ष 2002 में फायर स्टेशन के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया था। भूमि विवाद में मामला कोर्ट में चले जाने के बाद केंद्र का निर्माण भी लटक गया। इस संवंध में प्रभारी जिला अग्निशमन अधिकारी कहते हैं कि संसाधनों की कमी के बाबत हर साल शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। जबतक शासन कुछ नहीं करेगा। हम मौजूदा संसाधनों को लेकर ही मैदान में डटेगें। खास यह है कि गांव-गिरांव में आग बुझाने के लिए तालाबों में ढ़ंग से पानी भी नहीं है। अग्निशमन कर्मी भी इस अभाव का रोना रोते हैं।
विभाग के पास संसाधन
सदर स्टेशन:फायर टेंडर वाटर टैंकर,दो जीप पम्पसेट,दो वाटर टैंकर व माउजर एक
मनकापुर स्टेशन:फायर टेंडर वाटर टैंकर,एक जीप व पम्पसेट एक
इतने संसाधनों की है जरूरत👇
रेस्क्यू एक,एंबुलेंस चार,वाटर टैंकर (4500 ली०) पांच,छोटा वाटर टैंकर आठ,जीप पम्पसेट पांच,स्ट्रेचर 16,मैनपावर यानि संसाधनों के अनुरूप है।
फायर ब्रिगेड के सामने यह है समस्या
स्टेशन पर किए जाते हैं फर्जी काल,घनी आबादी व अतिक्रमण से घटनास्थल पर पहुंचने में दिक्कत,गांवों में पानी व ट्यूबवेल का अभाव,रास्ता सही न होने पर बड़ी गाड़ियों को घटनास्थल पर पहुंचने में परेशानी व घटनास्थल की सही जानकारी न मिलना।
शहरों में हाईडेंट खराब पड़े हुए हैं। इक्का दुक्का छोड़ दें तो ज्यादातर बदहाल हैं और उनका रखरखाव भी दुरुस्त नहीं है।
आग के हादसों पर एक नजर
घटनाएं – 2021 2022 2023
कुल घटनाएं – 360 306 361
क्षति संपत्ति 20943400 रु०,19049800र०,21094720 रु०
बचाई गई संपत्ति 8258100,55955900रु०,82475180रु०,
इंसानों की मौत 3 5 1
मवेशी 46 45 9
बचाए गए इंसान 20 17 12
बचाई गई मवेशी 13 9 53

