मुश्ताक अहमद
गोंडा।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पंडरी कृपाल पर स्वास्थ्य कर्मियों का अनशन तीसरे दिन भी जारी है। यह अनशन सीएचसी की अधीक्षिका के खिलाफ उत्पीड़न के आरोपों को लेकर चल रहा है, जिसके कारण स्वास्थ्य कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

स्वास्थ्य कर्मियों ने आरोप लगाया है कि सीएचसी की अधीक्षिका ने उनके साथ उत्पीड़न किया है, जिसके खिलाफ वे लामबंद हो गए हैं। उनका कहना है कि जब तक अधीक्षिका के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
इस विरोध में केवल स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी ही शामिल नहीं हैं, बल्कि विभिन्न संघों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। बेसिक हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन ने इस अनशन को अपना समर्थन दिया है, जबकि मातृ शिशु कल्याण महिला कर्मचारी संघ ने इसे आह्वान किया है। साथ ही, उत्तर प्रदेशीय सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ भी अधीक्षिका के प्रति अपने विरोध को जाहिर कर चुका है।
स्वास्थ्य कर्मियों की मांग है कि सीएचसी की अधीक्षिका को तत्काल स्थानांतरित किया जाए। इस मुद्दे पर स्वास्थ्य कर्मियों ने पहले भी सीएमओ दफ्तर का घेराव किया था, लेकिन उस समय सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा के साथ हुई वार्ता असफल रही थी।
दो दिन पहले शनिवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने सीएचसी पंडरी कृपाल पर धरना शुरू किया था, जिसके बाद एडी हेल्थ और सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा सीएचसी पर पहुंची थीं। उन्होंने कर्मियों के साथ बातचीत की और मंगलवार तक जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। हालांकि, अब तक इस आश्वासन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों का आक्रोश और भी बढ़ गया है।
महिला स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि वे अपनी शिकार हुई असमानता और उत्पीड़न को लेकर लड़ाई जारी रखेंगी। संघ की जिलाध्यक्ष अंजनी शुक्ला ने बताया कि जब तक प्रशासन इस मामले में कार्रवाई नहीं करता, तब तक महिला स्वास्थ्य कर्मी अनशन पर रहेंगी। उनका कहना है कि यह संघर्ष सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि सभी स्वास्थ्य कर्मियों के हक की लड़ाई है।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो वे अपनी संघर्ष को और तेज करेंगे। उनकी मांग है कि सीएचसी की अधीक्षिका पर उत्पीड़न के आरोपों की तुरंत जांच की जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इस आंदोलन ने स्वास्थ्य कर्मियों के बीच एकजुटता की भावना को और भी प्रगाढ़ किया है, और यह साबित कर दिया है कि जब तक उनका हक नहीं मिलत वे अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।
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