रियाजुद्दीन
नवाबगंज,गोंडा।इस्लामिक कैलेंडर के नवे महीनें पवित्र माहे रमजान की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में तैयारियों को लेकर हर एक मुसलमान जुटा हुआ है। रहमतों व बरकतों के इस महीने में अल्लाह की रहमत पूरे महीने बरसने वाली है। हर नेकी के बदले 70 गुना सवाब के साथ हर एक मुसलमान का दिन जहां रोज़े व इबादत में गुजरेगा तो वहीं रातें तरावीह की नमाजों में बीतेगी। इस्लाम धर्म के पांच अरकानों में से एक रमज़ान-उल-मुबारक के महीने में अल्लाह शैतान को कैद कर देता है। जिससे की वह लोगों की इबादत में खलल पैदा न कर सकें। रमज़ान के रोजे शुरू होने मे कुछ घन्टे ही बचे है। चाँद के नजर आते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ व रोज़े रखने का दौर शुरू हो जाएगा। ऐसे में सभी इबादतगाहो की साफ सफाई ,सजावट और घरो की तैयारियों में जुटे हैं। हर कोई रमजान से जुड़ी चीजों की खरीद फरोख्त में लगा हुआ है। हुसैनी जामा मस्जिद के एमाम मौलाना तौफीक रजा निज़ामी समर बस्तवी ने माह-ए-रमज़ान की एहमियत और फजीलत बयान किया कि रमज़ान के रोज़े में सहरी से इफ्तार होने के बीच में खाने,पीने से परहेज करते हुए जिस्मानी व अंदुरुनी ख्वाहिशातों को दूर रखना होता है।
इस्लामिक कैलेंडर मे इस नवें महीने की बड़ी फजीलत है। इसी महीने में अल्लाह ने अपने प्यारे नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स.) पर कुरआन नाजिल फरमाया। दिल में खौफ ए खुदा रखने वाले बन्दो को माहे रमजान का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस मुकद्दस महीने में अल्लाह अपने बंदों को एक के बदले 70 नेकिया अता करता है। मलिके दो जहां का इरशाद है कि रोजा मेरे लिए है इसका अजर् मैं खुद अता करता हूं। किसी वजह से रोज ना रख पाने वालों को रोजेदार का एहतराम करना चाहिए। मौलाना ने कहा कि रमजान-उल-मुबारक के इस महीने में तीन अशरे (हिस्से) होते है। जिसमें हर एक असरा दस दिनों का होता है। रमजान का पहला अशरा रहमत व बरकतों का है। दूसरा गुनाहों से मगफिरत व तीसरा जहन्नुम से आजादी का बताया है। यानी पूरे महीने अल्लाह की रहमत अपने बंदों पर झमाझम बरसती रहती है। बंदा पूरे महीने इबादत कर अपने नामा ऐ आमाल में नेकियों का जखीरा इकट्ठा करता रहता है। सहरी और इफ्तार मे अल्लाह की दी हुई बेमिसाल नेमतों का लुत्फ उठाता रहता है।

