नवाबगंज,गोंडा।श्री अवध रामलीला समिति कटरा शिवदयालगंज के संयोजन में आयोजित हो रही 12 दिवसीय श्री रामलीला महोत्सव के छठवें दिन लंका दहन की लीला का शाश्वत मंचन किया गया।मंचन का शुभारंभ राम लक्ष्मण और हनुमान जी की झांकी सजाकर पूजन अर्चन से हुआ।उसके बाद बालि और सुग्रीव में घनघोर युद्ध होता है।युद्ध के दौरान ही पेड़ की आड़ से प्रभु श्री राम बालि के ऊपर संघारक वाण चला देते हैं।जिससे बालि की मृत्यु हो जाती है।उसके बाद महाराज सुग्रीव अपनी सारी सेना को एकत्र करते हैं।और चारों दिशाओं में माता-सीता की खोज के लिए भेज देते हैं। दक्षिण दिशा को जाने वाले सेना का नेतृत्व युवराज अंगद को दिया जाता है।जिसमें हनुमान, नील, नल, जामवन आदि होते हैं।प्रभु श्री राम हनुमान को मुद्रिका निशानी के तौर पर देते हैं।जिससे माता- सीता को विश्वास हो सके।खोज करते हुए जब समुद्र तट पर युवराज अंगद की सेना पहुंचती है।तो वहां पर गिद्धराज जटायु के भाई संपाति अपनी लंबी दृष्टि से देखकर समुद्र के उस पर लंका के अशोक वाटिका में माता सीता की होने की बात बताते हैं। इस प्रकार सारी सेनाओं ने हनुमान जी को उनके बाल को याद दिलाते हैं।और हनुमान जी समुद्र लांघ कर लंका में पहुंचते हैं।जहां पर लंकनी और सुरसा का संघार कर लंका में प्रवेश कर भक्त विभीषण के महल में पहुंच जाते हैं। उसके बाद विभीषण के बताए हुए मार्ग से अशोक वाटिका में पहुंचकर माता सीता को मुद्रिका निशानी को तौर पर देते हैं।और फिर रामा दल की सारी स्थिति से अवगत कराते हैं।
माता सीता का आदेश पाकर हनुमान जी फल खाने के लिए अशोक वाटिका में जाते हैं। जहां पर फल खाने के साथ-साथ अपने बल और बुद्धि का परिचय देते हुए तमाम सैनिकों के साथ राजकुमार अक्षय कुमार का वध कर देते हैं।यह समाचार पाकर रावण अपने परम प्रतापी पुत्र मेघनाथ को बंदर को पकड़ने के लिए भेजते हैं।मेघनाथ अपने ब्रह्मास्त्र के द्वारा हनुमान जी को बंदी बना लेता है।और राज दरबार में पेश करता है।जहां पर विभीषण के हस्तक्षेप करने के कारण मृत्यु दंड न देकर हनुमान जी के पूछ में आग लगा दी जाती है।हनुमान जी एक विभीषण के महल को छोड़कर बाकी पूरी लंका नगरी में आग लगा देते हैं।पूरी लंका धू धू कर जल जाती है। राम का अभिनय शिबू गुप्ता, लक्ष्मण सर्वेश गुप्ता, हनुमान अमित कुमार राय, रावण गौरी शंकर गुप्ता, युवराज अंगद शुभम लस्सी, बाली अनूप कुमार गुप्ता पॉपुलर, सुग्रीव रंजीत कसौधन,जामवंत महेंद्र कसौधन, मेघनाथ रजनीश कमलापुरी,अक्षय कुमार प्रहलाद अन्य कलाकारों में इंद्रपाल गुप्ता,ओमप्रकाश कसौधन के अभिनय को दर्शकों ने खूब प्रशंसा की।कार्यक्रम का निर्देशन कपिलनाथ गुप्ता एवं संचालन सह निर्देशक मीडिया प्रभारी विनोद कुमार गुप्ता ने किया।इस अवसर पर आचार्य भोलानाथ तिवारी,सौरभ सिंह, शिवदास गुप्ता जैसे महत्वपूर्ण लोग उपस्थित रहे।

