करनैलगंज,गोंडा।रामलीला में श्रीराम की राज्याभिषेक लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि प्रभु श्रीराम अपने भाई भरत से मिलने के बाद भरत जी उन्हें राजगद्दी सौंप दिए। आनंद उत्सव की तैयारी होती है। भगवान राम का राजतिलक होता है। प्रथम तिलक गुरु विश्वामित्र करते हैं उसके बाद चारों वेद भगवान का तिलक करते हैं। सभी ब्राह्मण भगवान का तिलक करते हैं। मंगल गान होता है उत्सव मनाया जाता हैं।
भगवान का राजतिलक होने के बाद जोरदार आतिशबाजी होती है और भगवान की आरती होती है। राज्याभिषेक के बाद भगवान ने सभी को उपहार भेंट किया। माता सीता ने हनुमान जी को मोतियों की माला पहनाई। मोतियों की माला देख हनुमान जी उसे तोड़ तोड़ कर बिखेर देते हैं। यह देख दरबार में सभी हंसने लगे। इतने में भी बशर जी बोल पड़े बंदर इन मोतियों की कीमत क्या जाने, माता सीता को बहुत कष्ट हुआ। माता सीता के पूछने पर हनुमान जी ने बताया की जिसमें प्रभु श्रीराम नहीं वह मेरे कोई काम का नहीं। इतने में विभीषण बोले तुम्हारे ह्रदय में भी भगवान श्रीराम है इतना सुनते ही हनुमान जी अपना सीना फाड़ दिया। उसमें भगवान प्रभु श्रीराम और सीता की छवि विराजमान देख सभी आश्चर्यचकित हो गए। भगवान ने सभी को अपने-अपने राज्य वापस भेज दिया। परंतु हनुमान जी नहीं गए। इस लीला का मंचन होने के पश्चात एक माह तक चलने वाली लीला का समापन हुआ।

