गोंडा।नये संसद भवन परिसर में स्थापित बोधिसत्व बाबा साहेब डाॅ.अम्बेडकर की प्रतिमा दिनाँक 2/3 जून की रात्रि में संविधान विरोधी प्रशासन ने हटाकर संसद भवन के पीछे स्थापित किया है। जो बाबा साहेब की प्रतिमा और संविधान समर्थकों का घोर अपमान है। और ये संविधान विरोधी मानसिकता का परिचायक है। नये संसद भवन में पीठ के दाहिने तरफ सेंगोल की स्थापना करना राजतंत्र का द्योतक और संविधान विरोधी सोच की पहचान है। ऐसे कृत्य से सम्पूर्ण भारत के संविधान समर्थकों में काफी रोष और आक्रोश है। जो शासक वर्ग की संविधान के प्रति घटिया सोच को प्रदर्शित करता है। भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के फलस्वरूप ही राजतंत्र का अंत और लोकतंत्र की शुरुआत हुई थी। बावजूद इसके राजतंत्र और राजदंड के प्रतीक को संसद भवन में स्थापित करके किस राष्ट्रवाद और भारतीयता को प्रदर्शित करना चाहते है। सम्पूर्ण भारत के संविधान समर्थक ऐसे कृत्य की भर्त्सना और निंदा करते है। इसलिए महामहिम राष्ट्राध्यक्ष,भारत संघ नयी दिल्ली को ज्ञापन दिया है। दिए गए ज्ञापन में मांग की है कि भारत के संविधान और लोकतंत्र की आन-बान-शान का प्रतीक बोधिसत्व डाॅ०अम्बेडकर की प्रतिमा संसद भवन के गेट के पास स्थापित कराने और संसद के पीठ के दाहिने ओर स्थापित सेंगोल को हटाकर संविधान की स्थापना कराने हेतु कार्यवाही करने की अनुकम्पा करें जिससे विधि व्यवस्था में संविधान समर्थकों का विश्वास कायम रहे।

ज्ञापन देते समय मास संगठन के राष्ट्रीय संगठक ए०के०नन्द,काशीराम मौर्य,आरके राव,किशोरीलाल,हरिप्रसाद,छोटेलाल,नन्द किशोर वर्मा-एडवोकेट,राम करन वर्मा-एडवोकेट,राजकरन अकेला एडवोकेट,टीपी अशोक एडवोकेट,हरिनन्दन मौर्य एडवोकेट,संतोष कुमार कुलदीप एडवोकेट,शिव कुमार एडवोकेट,शिव कुमार विश्वकर्मा,जगत नारायण मौर्य एडवोकेट,राजेश पाल एडवोकेट,अवध प्रताप गौतम,जय शंकर प्रसाद गौतम,खुशीराम मौर्य,पाटेश्वरी प्रसाद वर्मा,अनिरुद्ध यादव,भवानीफेर,दिनेश कुमार,मनोज कुमार,राम पाल,देवी प्रसाद हंस,राम सुरेश वर्मा-एडवोकेट,अनिल कुमार वर्मा-एडवोकेट,शिवनाथ गुप्त एडवोकेट,अमरेश गौतम एडवोकेट,लाल चंद गौतम,राम बहादुर मौर्य एडवोकेट,शिव प्रसाद वर्मा-एडवोकेट,राम नाथ एडवोकेट,हरीराम एडवोकेट ,सत्य देव और प्रेम कुमार एडवोकेट उपस्थित रहे। ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को दिया है।

