▶वजीरगंज के आधा दर्जन स्थानों का हुआ था चिन्हीकरण
▶आरंगा पक्षी विहार की तस्वीर तो कुछ बदली लेकिन बारादरी वैसी ही बदरंग
मुश्ताक अहमद
गोंडा।चुनाव में वजीरगंज के इर्द-गिर्द मड़रा रही सियासी हस्तियों ने भले ही स्थानीय मुद्दों पर राजनीति कर मुकाम हासिल कर ली हो, लेकिन यहां के विकास में उनकी दिलचिस्पी अब लोगों को अखर रही है।
पर्यटन की दृष्टि से अवध सूबे के नवाब आसिफुद्दौला के शासन काल में राजधानी रहा वजीरगंज अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। सौंदर्यीकरण की योजना कई बार बनी और शासन की स्वीकृति भी हुई, लेकिन उसका क्रियान्वयन नहीं हो पाया। जिस एजेंसी को इस ऐतिहासिक क्षेत्र को सौंदर्यीकरण का जिम्मा दिया गया, उसने उसके साथ छलकपट किया। प्राचीन ऐतिहासिक आरामगाह महल नवाब आसिफुद्दौला का देखरेख के अभाव में बदहाली का शिकार है। वर्षों पूर्व बारादरी का सौंदर्यीकरण की खाना पूर्ति की गई लेकिन कोई तब्दीली नहीं हो पाई। इससे सटी अन्य ऐतिहासिक इमारतें एक दरा, तीन दरा, सराय पोख्ता अपनी दुर्दशा की कहानी बयां कर रही है। बारादरी से सटी कोंडर झील 4 दशक पूर्व मत्स्य विहार का दर्जा देकर झील की साफ-सफाई कराई गई थी। इसका उद्देश्य यह था कि इससे यहां का आकर्षण लोगों में बढ़ेगा। देखरेख न होने से यह स्थल निष्प्रयोज्य आकर्षण हीन हो गया है। बारादरी परिसर में जो रौनक पहले थी,वह खत्म हो गई। यहां न तो अच्छे गुलाब और न ही तैरती मछलियां न ही केवड़े की खुशबू। बारादरी में अब लोग शराब पीते हैं। इसके आसपास गंदगी का साम्राज्य है। मैदान में झाड़-झंखाड़ तो हैं ही,विश्व के तीन सबसे बड़े घातक खरपतवार में से एक गाज घास (पैराथीनियम-हिस्टोरोफोरस) के तमाम पौधे यहां देखे जाते हैं।यह इमारत सरकार के नियंत्रण में है। इसकी देखभाल पुरातत्व विभाग के हवाले है। इसके चारों ओर काफी जमीनें हैं। कुछ पर इलाकाई लोगों का कब्जा है। ऐसे में यदि वजीरगंज पर्यटन नगरी हो जाए तो कुछ ही समय में यहां की तकदीर बदल सकती है। इसलिए चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोंचना चाहिए।

ये है ऐतिहासिक स्थल
परमहंस आश्रम मधवापुर टिकरी शाखा सती अनुसुइया, अरंगा-पार्वती झील व झील के तट पर बहादुरा गांव में स्थित शिव-पार्वती मंदिर,कोंडर गांव के पास झील की तट पर स्थित कोणार्क मंदिर, बालेश्वरनाथ स्थित प्राचीन शिव मंदिर, मजगवा राजघराना द्वारा स्थापित शिव मंदिर व तालाब के साथ सुरंग और खंडहर में तब्दील महल,स्वामी गिरधरानंद आश्रम हवेलियां चंदापुर इसके अलावा रौजा गांव में स्थित सैय्यद सालार रज्जब अली हटीला शाह की दरगाह का शरीके स्थल है।
सियासत दानों की उपेक्षा का रहा असर
विश्व के मानचित्र में यहां का स्थान न मिलने से वजीरगंज के वाशिंदे काफी दुखी हैं।कपड़ा व्यवसाई सुशील बाबा कहते हैं कि यहां आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा कुछ भी नहीं किया जाता।हर बार लोगों को छला ही गया है। वहीं दवा व्यवसाई प्रदीप गुप्ता कहते हैं कि नामचीन इमारतों के साथ-साथ हरी सब्जी का हब है।यहां की ताजा तरीन सब्जी गाड़ियों पे लादकर पड़ोसी मुल्क नेपाल व देश के कई प्रांतों में जाती है। इस ओर इनका ध्यान नहीं जाता।सर्राफा व्यवसाई सतीश भारती कहते हैं कि समस्याएं वही हैं जो पहले थीं सड़क, बिजली,पानी पर अटका है। यहां बड़े प्रोजेक्ट की उम्मीद करना बेमानी है। कुछ काम हो तो लोगों में आशा दिखे।

