मुश्ताक अहमद
गोंडा।इसे जागरुकता कहें,आस्था कहें या वैज्ञानिक सोच। वजीरगंज विकास खंड की सहिबापुर गांव के लोगों ने नीम को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया है। यहां के हर घर के दरवाजे पर नीम का एक पेंड़ है। गांव में लगभग 500 घर है। इन घरों के सामने नीम के पेड़ पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं।

वजीरगंज ब्लाक की सहिबापुर गांव में हर घर के सामने व आसपास नीम के पेड़ हैं। ग्रामीणों के अनुसार यहां घर के सामने या आसपास नीम का पेड़ लगाने का चलन दो दशक पुराना है। इसलिए पांच हजार से ज्यादा की आबादी वाले इस गांव में जितने घर हैं उससे ज्यादा नीम के पेड़ हैं। दरअसल गांव में ही एक पुराना नीम व पीपल का पेड़ है। मान्यता है कि पीपल पर ब्रम बाबा तो नीम पर मां काली का वास है। नीम का पेड़ हिंदू धर्म में पूजनीय है लेकिन सहिबापुर में इसे मां मानकर इनकी पूजा की जाती है।
इस गांव में कोई नया घर बनवाता है तो घर के पास नीम का पेड़ जरुर रोपता है। गांव के प्रधान दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि नीम के पेड़ का गांव में बहुत महत्व है। यहां के आधा दर्जन पेड़ों को तो नाम मिल गया है। 75 वर्षीय सहदेव सिंह ने बताया कि नीम की वजह से गांव में बीमारियां फैलने का डर कम हो जाता है।
हर दृष्टि से उपयोगी है नीम
गांव के लोगों ने नीम के पौधे का पौधरोपण कर बहुत तर्क दे रहे हैं। हर दृष्टि से इस पौधे को उपयोगी बताते हुए गांव वालों ने नीम को औषधीय गुणों से भरपूर बताते हैं। इमारती लकड़ी के रूप में भी नीम बेजोड़ है, साथ ही नीम के पेड़ के आसपास चिकित्सकों की मानें तो चेचक, ज्वर, कालरा साथ ही अन्य संक्रमण का खतरा काफी हदतक कम रहता है।
खेती में भी लाभदायक है नीम की खली
कृषि विभाग के सराफत उल्ला ने बताया कि नीम की बीज से मिलने वाली खली खेती में काफी उपयोगी है। यह जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ फसल को कई रोगों से बचाती है। खेत में दीमक व अन्य कीड़े व कीट पतंगों से मुक्ति मिलती है। सहिबापुर गांव के तमाम लोग नीम की खली का उपयोग खेती में करते हैं।
पेड़ों के अलग-अलग नाम
सहिबापुर में कुछ नीम के पेड़ों को उनके नामों से ही पूजा जाता है। सूर्यभान पंडित के घर के सामने लगे पेड़ को ‘बड़कई महारानी’, सुशील सिंह के घर के सामने लगी नीम को ‘माता श्याम सुंदरी’, विजय कुमार पाण्डेय के घर के सामने लगे नीम के पेड़ को ‘शीतला माता’, व एक मंदिर के पास लगे पेड़ को ‘बुढ़िया मइया वाली नीम’ के नाम से जाना जाता है।

