मुश्ताक अहमद
गोंडा।वो झोपड़ी में रहकर अपनी बेबसी,लाचारी और गरीबी का दंश झेल रहा है।इसलिए उसके आंसुओं की आवाज सियासत और नौकरशाही के इस नक्कारखाने के अहलकारों को सुनाई नहीं पड़ रही है। विजय कुमार के मुंह में कैंसर हैं तो वहीं उसके 9 वर्षीय बेटे कन्हैया के पेट का आपरेशन हुआ है। बीमारी व बेबसी की वजह से बिस्तर पर पड़ा है। वहीं पत्नी राधा लाचार बैठी है पति और बेटे की दवा व पेट भरने की जिम्मेदारी अब इस पर है। अभी तक आपने जो सुना वो किसी फिल्म की पटकथा या किसी उपन्यास की कहानी का मुखड़ा नहीं है। बल्कि एक बेबस लाचार गरीब के आंसुओं की अल्फाज में समेटने की कोशिश भर है। दिल को लरजा देने वाली इस खबर को खबर न समझिए, बल्कि हो सके तो मदद के लिए आगे आने की कोशिश भी कीजिएगा। यूपी लाइव टाइम 24×7 को यकीन है कि आप सब में से कोई न कोई इस परिवार की मदद के लिए आगे ज़रूर बढ़ेगा।
तड़प कर बोला विजय,ऐसी जिंदगी से मौत बेहतर
हम क्यों कुछ कहें एक परिवार की तखलीफ पीड़ित मुखिया ही सब कुछ कह देता है। नवाबगंज ब्लाक के हरदवा गांव का रहने वाला विजय कुमार कहता है कि ऐसी जिंदगी से मौत बेहतर है। पति के मुंह में कैंसर है तो वहीं जन्म से ही बेटे को लैटरिंग का रास्ता न होने से आपरेशन कराकर पेट में से लैटरिंग का रास्ता बनाया गया है। बताया कि भगवान के अलावा अब कोई साथी नहीं है। विजय मेहनत मजदूरी कर घर चला रहा था, जब से उसे पता चला कि उसके मुंह में कैंसर हो गया है। तब से उसकी तिल-तिल कर जिंदगी घट रही है और उसके घर में चूल्हा जलना मुश्किल है। कई-कई दिनों तक तो फांकों से गुजर रहा है। कभी कोई मदद कर देता है तो पेट की आग थोड़ी बुझ जाती है।
जब खाने को नहीं तो कैसे हो इलाज
दो वक्त की रोटी के लाले पड़े रहते हैं ऐसे में पेट के इलाज के लिए पैसे कहां से लाए जाएं। पत्नी राधा बताती है कि शुरू में डाक्टरों को दिखाया गया लेकिन महंगे इलाज की वजह से कुछ भी नहीं हो सका। अब नसीब मान कर जैसे तैसे जिंदगी कट रही है।
सच का सामना तो कीजिए
कैंसर से पीड़ित पति का नाम विजय कुमार तो बेटे का नाम कन्हैया है। मां का नाम राधा है। गोंडा जिले के नवाबगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत हरदवा है। परिवार बहुत ही लाचार है। बीमार पति और बेटे का दुनिया में पत्नी और मां के अलावा कोई नहीं है। घर में बहुत ही गरीबी है, सूखी रोटी भी नहीं नसीब होती है। गांव के सुनील कुमार ने बताया कि विजय मेहनत मजदूरी कर परिवार की जीविका चलाता था। जब वो बीमार रहने लगा पत्नी उसे अस्पताल लेके गई, डाक्टरों ने जांच कराई तो पता चला कि उसके मुंह में कैंसर है। वहां पर डाक्टरों ने पैसे मांगे,पैसे न होने के कारण इलाज नहीं हो पाया।
कुछ युवा मदद को आए
इस परिवार की मदद में कुछ युवा जरुर आगे आए हैं। सुनील कुमार वर्मा और उनकी टीम ने मिलकर मदद पहुंचाई है।

