मुश्ताक अहमद
गोंडा।धान खरीद प्रणाली में इस बार बड़ा बदलाव हुआ है। अब केवल खतौनी के आधार पर धान की बिक्री संभव नहीं है। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि धान बेचने के लिए किसानों को खसरा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से फसल बुआई और बिक्री के बीच पारदर्शिता आएगी और अब तक की गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।
लखनऊ में खाद एवं रसद विभाग की विपणन शाखा की बैठक में यह निर्णय लिया है। बैठक में डिप्टी आरएमओ, आरएमओ और संभागीय खाद्य नियंत्रक सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। तय हुआ कि सरकार द्वारा नामित एक निजी एजेंसी किसानों के खेतों का सर्वे करेगी। एजेंसी के कर्मी खतौनी लेकर खेत का निरीक्षण करेंगे, बुआई की वास्तविक स्थिति का डाटा ऑनलाइन दर्ज करेंगे और जीपीएस मशीन से खेत का अक्षांश–देशांतर लेते हुए किसान व फसल की फोटो अपलोड करेंगे। यह पूरा विवरण राजस्व विभाग से साझा किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार अब तक यह शिकायत मिलती रही थी कि किसान बुआई कम करते हैं लेकिन बिक्री कहीं अधिक कर देते हैं। इस स्थिति से खरीद प्रणाली पर सवाल खड़े होते थे। लेकिन खसरे की व्यवस्था लागू होने के बाद इस पर अंकुश लग सकेगा।
संभागीय खाद्य नियंत्रक चन्द्रभान यादव ने दूरभाष पे कहा कि “धान खरीद में किसानों को किसी तरह की कठिनाई न हो, इसके लिए शासन ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। खसरे की व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े की संभावना खत्म होगी। किसान जितनी बुआई करेंगे,उतना ही बिक्री का अधिकार उन्हें मिलेगा।”
धान बिक्री से जुड़े अन्य पुराने नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ बुआई और बिक्री में संतुलन स्थापित करना और अनियमितताओं पर रोक लगाना है।
बीते वर्ष खसरे से खरीद की व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी थी, जिसके बाद खतौनी से खरीद को मान्य कर दिया गया था। लेकिन इस बार सरकार ने खसरा अनिवार्य कर दिया है।

