बलरामपुर।उतरौला में अरबी माह रबीउल अव्वल की 12 तारीख़, यानी 5 सितम्बर 2025 को इस्लाम के अंतिम पैगम्बर और इंसानियत के रहबर, पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की यौमे पैदाइश पूरे अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाई जाएगी। इस पवित्र अवसर को लेकर मुस्लिम समाज में उत्साह और खुशी का माहौल है।
जगह-जगह घरों और मोहल्लों में सजावट का काम शुरू हो चुका है। गली-कूचों में झंडे, झालरें और फूलों से रौनक बढ़ा दी गई है। मस्जिदों को रोशनी और हरियाली से सजाया जा रहा है। कई घरों में बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से सजावट की जा रही है जिससे रात के वक्त पूरा माहौल जगमगाने लगेगा।
रबीउल अव्वल की पहली तारीख से ही मिलाद शरीफ़ और महफ़िलों का आयोजन लगातार किया जा रहा है। घर-घर में कुरआन की तिलावत, नात-ख्वानी और दुआओं का सिलसिला जारी है। लोग अपने घरों में रिश्तेदारों और मोहल्ले के बच्चों को बुलाकर मिठाइयाँ बाँट रहे हैं और हुज़ूर की यौमे पैदाइश की खुशी का इज़हार कर रहे हैं।
इस बार भी जुलूस-ए-मोहम्मदी की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। मोहल्लों में समितियाँ बनाकर रूट और इंतज़ाम तय किए जा रहे हैं। नौजवानों और बच्चों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। छोटे-छोटे बच्चे भी झंडे और बैनर लेकर जुलूस की तैयारियों में शामिल हो रहे हैं।
लोगों का कहना है कि पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की यौमे पैदाइश सिर्फ एक खुशी का दिन नहीं बल्कि इंसानियत के लिए रहमत का दिन है। इसी दिन वह हस्ती दुनिया में आई जिन्होंने अंधकार में डूबे समाज को रोशनी दिखाई और अमन, इंसाफ़ तथा मोहब्बत का पैग़ाम दिया।
इस मौके पर जगह-जगह दरूद-ओ-सलाम की महफ़िलें होंगी, बच्चों के बीच इनाम बाँटे जाएँगे और गरीबों के बीच भोजन व मिठाई का वितरण किया जाएगा। मुस्लिम समाज इस दिन को आपसी भाईचारे और मोहब्बत के प्रतीक के रूप में मनाता है।
पूरे क्षेत्र में इन तैयारियों से धार्मिक रौनक और भाईचारे का खूबसूरत माहौल दिखाई दे रहा है।

