हरीश कुमार गुप्ता
बलरामपुर।उतरौला प्राचीन श्री दुःख हरण नाथ मंदिर में कजली तीज के अवसर पर मंगलवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोर होते ही महिलाएँ और पुरुष मंदिर परिसर में पहुँचकर भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने लगे। विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं ने इस दिन व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।

बाबा श्री दुःख हरण नाथ मंदिर सेवा समिति के कार्यकर्ता पूरे उत्साह और तत्परता से श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे। *महंत मयंक गिरी जी महाराज* ने कजली तीज के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व अखंड सुहाग, पति की दीर्घायु तथा अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा और नीम के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व है।
कजरी तीज का धार्मिक महत्व भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना से जुड़ा है। वहीं सांस्कृतिक दृष्टि से यह पर्व लोकगीत, कजरी गान, झूला झूलने और सोलह श्रृंगार की परंपरा से समृद्ध है। महिलाएँ सजधज कर एकत्र होकर गीत-नृत्य करती हैं और इस दिन को आनंदमय बनाती हैं।
शाम के समय मंदिर परिसर में कई विशेष आयोजन हुए जिसमें
सायंकाल 07:00 बजे – श्री सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
रात्रि 08:30 बजे – भूतभावन भगवान भोलेनाथ का दिव्य एवं भव्य श्रृंगार पूजन संपन्न हुआ।
रात्रि 09:15 बजे – देवाधिदेव महादेव का शयन श्रृंगार, महाआरती एवं दर्शन हुए। इसके उपरांत श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धा और भक्ति के रंग में सराबोर रहा। कजरी गीतों, झूलों और श्रृंगार से पूरा वातावरण हरियाली और भक्ति भावना से परिपूर्ण दिखा। महिलाओं ने जहां सौंदर्य और श्रृंगार का उत्सव मनाया, वहीं परिवारों ने सामाजिक मेल-जोल के साथ इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाया।
मंदिर के सह-व्यवस्थापक अर्पित गुप्ता ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “हरितालिका तीज का यह पावन पर्व हम सबको भक्ति,सौहार्द और संस्कृति से जोड़ता है। भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे, जीवन में सुख-समृद्धि और मंगल का संचार हो।”
इस प्रकार कजरी तीज का पर्व धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम बनकर नगरवासियों के हृदय में भक्ति और आनंद की छाप छोड़ गया।

