हरीश कुमार गुप्ता
बलरामपुर।उतरौला टाइनी टाट्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल डायरेक्टर सैफ अली उक्त उदगार व्यक्त करते हुए बताया कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों की दिनचर्या और पढ़ाई पर गहरा असर डाल रहे हैं। डायरेक्टर सैफ अली ने चिन्ता व्यक्त करते कहा कि“सोशल मीडिया और बच्चों में मोबाइल का दुष्प्रभाव वास्तव में गंभीर चिंता का विषय है। मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों की एकाग्रता, शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। अभिभावकों और शिक्षकों दोनों को मिलकर डिजिटल अनुशासन लागू करना होगा ताकि मोबाइल केवल सीखने का साधन बने, लत नहीं।”
सैफ अली का कहना है कि मोबाइल की बढ़ती लत बच्चों की अध्ययन क्षमता को कमजोर कर रही है। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से उनका ध्यान भटकता है और पढ़ाई में मन नहीं लगता। जिन बच्चों का प्रदर्शन पहले बेहतर था, अब उनमें भी गिरावट दिखाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल चलाने से बच्चों की आँखों पर असर पड़ता है, नींद पूरी नहीं हो पाती और शारीरिक सक्रियता भी कम होती है। इससे मोटापा और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों की कमी बच्चों के भविष्य के लिए चिंताजनक है।
सैफ अली ने यह भी कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया ने बच्चों का वास्तविक जीवन से जुड़ाव कम कर दिया है। पहले जहाँ बच्चे मित्रों के साथ खेलकूद और संवाद में समय बिताते थे, वहीं अब वे आभासी दुनिया में खोए रहते हैं। इसका सीधा असर उनके सामाजिक व्यवहार और पारिवारिक जुड़ाव पर पड़ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मोबाइल को पूरी तरह से नकारना संभव नहीं है, क्योंकि यह शिक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। लेकिन डिजिटल अनुशासन ही इसका समाधान है।
अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल प्रयोग का समय सीमित करना चाहिए। शिक्षकों को कक्षा में मोबाइल के दुष्प्रभावों पर चर्चा करनी चाहिए। बच्चों को खेल, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में जोड़ना आवश्यक है।
अंत में डायरेक्टर सैफ अली ने कहा कि “यदि बच्चों को मोबाइल की लत से नहीं बचाया गया तो आने वाली पीढ़ी मानसिक, शारीरिक और शैक्षिक रूप से कमजोर हो सकती है। हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि मोबाइल बच्चों के लिए शिक्षा और प्रगति का साधन बने, न कि भटकाव का कारण।”

