आर०जे०शुक्ल ‘यदुराय’
गोण्डा।ब्रिटिश शासन के विरोध में 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम से लेकर बीसवीं सदी में कांग्रेस के सत्याग्रह आन्दोलन में जनपद की प्रमुख भूमिका रही है।
आजादी की लड़ाई में जनपद गोण्डा की भूमिका पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यधर्मी आर. जे. शुक्ल ‘यदुराय’ बताते हैं कि आन्दोलनों की शृंखला में 1907 में जनपद में भयंकर अकाल पड़ने पर लाला लाजपतराय ने दौरा किया। उनके आह्वान पर आर्य समाजियों ने कांग्रेस की सदस्यता लेकर राहत शिविर की स्थापना की और लोगो को जागृत किया। जलियांवाला बाग कांड की जिले में तीव्र प्रतिक्रिया हुई।
कांग्रेस के अग्रणी नेता बाबू ईश्वर शरण, बाबू लाल विहारी टण्डन, राम चन्द्र श्रीवास्तव उर्फ बच्चू बाबू के नेतृत्व में सैकड़ों सत्याग्रहियों आन्दोलन को धार दिया। 25 जून 1922 को कांग्रेस सम्मेलन में पं मोतीलाल नेहरू की उपस्थिति में डेढ़ हजार सत्याग्रहियों ने खद्दर पहनने का संकल्प लिया। 30-31 मार्च 1922 को बभनान के सन्निकट सिसई रानीपुर में प्राध्यापक व साहित्यकार डा. शैलेन्द्र नाथ मिश्र के बाबा पं. दातादीन मिश्र के संयोजन में कांग्रेस का वृहत किसान सम्मेलन में पं. जवाहर लाल नेहरू, इन्दिरा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं ने भाग लेकर स्वतंत्रता आन्दोलन को परवाना चढाया।
इस सम्मेलन में बाबू द्वारिका सिंह, मथुरा सिंह, पूर्व स्वतन्त्रता सेनानी अध्यक्ष पं. गया प्रसाद मिश्र आदि नेताओं की प्रमुख भूमिका रही। सन् 1924 में कांग्रेस संगठन को सशक्त बनाने के लिए रघुपति सहाय ‘फिराक’ ने जनपद का दौरा किया। फरवरी 1928 को साइमन कमीशन के विरोध में जनपद में पूर्ण बन्दी रही।
9 अक्टूबर 1931को मनकापुर के महाराज रघुराज सिंह के आमन्त्रण पर महात्मा गांधी ने दौरा किया और मनकापुर व गोण्डा के रानी बाजार में आयोजित सभाओं में जनता ने महात्मा जी की सहयोग राशि से झोली भर दी। नगर के गोलागंज स्थित प्रेम पकडिया मैदान में 11अप्रैल 1930 को नमक आन्दोलन का आयोजन किया। जनपद के अन्य स्थानों पर कांगेसियों ने नमक बनकर अंग्रेजों का कानून तोडा। 17 दिसम्बर सन् 1927 को काकोरी कांड के क्रांतिकारी राजेन्द्र लाहिडी को गोण्डा कारागार में फांसी दी गई। सन् 1937 के प्रांतीय असेम्बली चुनाव में बाबू ईश्वरशरण व बाबू लालविहारी टण्डन विधायक चुने गए।
इसी कड़ी में स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं व छात्रों की भूमिका सुनिश्चित करने के लिए लिए सुभाष चन्द्र बोस ने नगर में दौरा किया और रामचन्द्र श्रीवास्तव उर्फ बच्चू बाबू के घर प्रवास कर उन्हें आन्दोलन की बागडोर सौंपी। 09 अगस्त 1942 को कांग्रेस के निर्णायक ‘अंग्रेजों भारत छोडो ‘ के ऐतिहासिक आंदोलन में जनपद के सैकड़ों सेनानियों ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ गिरफ्तारी दी। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने पर नगर व गांव में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर जश्न मनाया गया।

