उतरौला,बलरामपुर।नगर के प्राचीन बाबा श्री दुःखहरण नाथ मन्दिर प्रांगण में आयोजित दस दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का क्रम शनिवार को षष्ठम दिवस में प्रवेश कर गया। कथा का यह दिवस श्रद्धा, रहस्य और तत्वज्ञान से ओत-प्रोत रहा। कथावाचक आचार्य बृजलाल मिश्र जी महाराज की वाणी में शिव तत्व का जो गूढ़तम चित्र उकेरा गया, उसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन का संयोजन बाबा श्री दुःखहरण नाथ मन्दिर सेवा समिति, उतरौला के सौजन्य से किया जा रहा है। आयोजन समिति में मयंक गिरि, त्रिपुरारी गिरि, अर्पित गुप्ता, मोनू गुप्ता सहित मन्दिर समिति के सभी सदस्यगण तन-मन से सेवा में समर्पित हैं।
आचार्य श्री ने बताया कि नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों ने सूतजी से जिज्ञासा की कि भगवान शिव के विभिन्न अवतारों के विषय में विस्तार से बताया जाए। इस पर सूतजी ने शिव जी के अष्ट प्रमुख अवतारों का वर्णन किया, जो भिन्न-भिन्न युगों एवं परिस्थितियों में लोक कल्याण हेतु प्रकट हुए।
1.सद्योजात, 2.वामदेव, 3.अघोर, 4.तत्पुरुष, 5.ईशान, 6.वीरभद्र, 7.भैरव, 8.हनुमान (शिवांश रूप में)
इन सभी अवतारों की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि ये अवतार शिव की व्यापकता, बहुआयामी स्वरूप एवं उनके लोककल्याणकारी भाव को प्रकट करते हैं।
कथा के विशेष खंड में अर्धनारीश्वर स्वरूप का विस्तृत वर्णन हुआ। आचार्य श्री ने इसे शिव और शक्ति के अद्वैत भाव का प्रतीक बताया। यह रूप केवल आध्यात्मिक संदेश नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के संतुलन और समानता का प्रतीक है, जहाँ पुरुष और प्रकृति दोनों के सामंजस्य से सृष्टि संचालित होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा “शिव को केवल पूजना पर्याप्त नहीं, उनके गूढ़ रूप को समझना, जीवन में आत्मसात करना ही सच्चा शिव आराधन है।”
कथा के दौरान “हर हर महादेव” के जयघोष से मंदिर प्रांगण गूंज उठा। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर शिव महिमा में डूबते चले गए। इस आध्यात्मिक अनुभव को और भी दिव्यता प्रदान की अखण्ड म्यूजिकल ग्रुप के गायकों एवं वादकों ने। उनके भावपूर्ण भजन, शिव तांडव स्तोत्र व नाद ने श्रोताओं को शिव तत्व की गहराइयों तक पहुंचा दिया।
दिवसीय कथा के समापन पर शिवजी की महाआरती सम्पन्न हुई, जिसमें नगर के वरिष्ठ नागरिकों, युवा श्रद्धालुओं एवं महिलाओं ने सहभागिता की। कथा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

