गोंडा।नवाबगंज से अयोध्या को जाने वाला ढेमवा मार्ग के तीन वर्षो बाद भी सुधरने के कोई आसार नहीं दिख रहे। बरसात भी शुरू हो गयी है। पानी का जलस्तर बढ़ते ही फिर मार्ग बंद हो जायेगा। इसी मार्ग से हजारों लीटर दूध, खोया, पनीर, घी के साथ गन्ना, गेहूं अयोध्या लखनऊ तक सप्लाई होता है। लेकिन 4 से 5 महीने मार्ग बंद होते ही समस्याओं का अम्बार लग जाता है। यही नहीं नवाबगंज, तरबगंज, बेलसर मनकापुर सहित बस्ती जिले के लोगों क्व लिए इधर स्व लखनऊ का सफर आसान हो गया था. किन्तु बाढ़ के चलते लगातार जीर्ण शीर्ण हुए इस मार्ग पर किसी ने कृपा नहीं की। क्षेत्रीय माननीयों का प्रस्ताव भी परवान् नहीं चढ़ सका। लोगों की मुसीबते कम नहीं हुई। शिक्षा, व्यापार, कृषि, नौकरी आदि क्षेत्रों में मार्ग के अवरूद्ध होने पर प्रभाव पड़ता है। आइआईटी रुड़की को मॉडल स्टडी के लिए 72 लाख रूपये भी 6 माह पहिले मिल गए लेकिन स्टडी का काम अबतक नहीं पूर्ण हो सका जिसके चलते आगे कोई काम नहीं आगे बढ़ सका।
हर साल बाढ़ के बाद बढ़ जाता है तबाही की मंजरः ढेमवा रोड के कटान वाले स्थानों पर बीते तीन साल से हर साल बाढ़ के बाद तबाही का मंजर और भी बढ़ जाता है। पक्के पुल के निकट मुख्य कटान वाली जगह के दायरे में हल साल कुछ बढ़ोतरी हो जाती है। बाढ़ के पानी के प्रेशर से कटान वाले जगह की चौड़ाई और गहराई दोनों में इजाफा हो जाता है। इसके साथ ही रोड की पटरी भी निरन्तर नदी के धारा में विलीन हो जाती है। वर्ष 2022 में आई बाढ़ के दौरान सड़क तीन स्थानों पर कट गई थी। साथ ही रोड के एक तरफ की पटरी कई किलोमीटर की दूरी में बह गई थी। इसकी विभाग द्वारा अब तक मरम्मत नहीं कराए जाने स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आईआईटी को मॉडल स्टडी के लिए करीब 72 लाख रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। मॉडल स्टडी के लिए जरूरी डाटा आईआईटी को मुहैया करा दिया गया है। इसमें कम से कम तीन माह का वक्त लगता है। मॉडल स्टडी की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही शुरू हो पाएगी।


