मुश्ताक अहमद
गोंडा।ज्यों-ज्यों तापमान बढ़ रहा है, उसका असर फसलों पर पड़ रहा है। जिससे किसान चिंतित दिख रहे हैं। फरवरी माह में तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम भी 16 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने लगा है। हर दिन तापमान में वृद्धि हो रही है। हवा भी तेज चल रही है। इससे खेतों की नमी तेजी से सूख रही है। बदले मौसम का सबसे अधिक असर गेहूं की फसल पर है।
जिससे फसल के दानों का आकार अपरिपक्व रह जाएगा। गुणवत्ता खराब होगी। जिससे उपज प्रभावित होने की संभावना है। इससे उबरने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने बीच-बीच में हल्की सिंचाई करने का सुझाव दिया है, जिससे प्रतिकूल प्रभाव को कम और फसल वृद्धि को बरकरार रखी जा सके।
किसानों के माथे पर पसीना
जगदीशपुर कटरा के अब्दुल कैयूम का कहना है कि फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता सता रही है। एकाएक गर्मी पड़ने लगी है। आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ेगा। मो०हनीफ कहते हैं कि इस बार अभी तक फसलें अच्छी थी। फरवरी में ही मार्च वाली गर्मी से फसलें प्रभावित हो रही हैं। अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए । वजीरगंज कृषि रक्षा इकाई केन्द्र में तैनात सराफत अली ने बताया कि 15 से 20 दिन बाद का मौसम पहले आ गया है। अभी जो मौसम है वह 20 दिन बाद वाला है। रात का तापमान 18 से 19 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। मौजूदा समय में दिन और रात दोनों का तापमान घट बढ़ रहा है। मौजूदा समय फसलों के वानस्पतिक वृद्धि का समय चल रहा है। तापमान बढ़ने से पौधों का विकास प्रभावित हो रहा है। पौधों के कल्ले मौसम में नमी कम होने से सूख जा रहे हैं। जो मौसम चल रहा है। वह पौधों में फूल और फल के आने के समय का है।
गेहूं के पौधों में बालियां निकलने लगी हैं। पहले बोआई वाले गेहूं का उत्पादन 20 से 25 और लेट वालों का करीब 50 फीसद कम हो जाएगा। सरसों में परिपक्वता पहले आ जाएगी। इससे दाने कमजोर हो जाएंगे। सरसों व मसूर के दानों के भराव का समय चल रहा है। मौसम के बदलाव का असर सभी फसलों पर पड़ेगा। किसान फसलों की हल्की सिंचाई करके नमी बनाए रखें। खेतों में नमी रहने से फसलें बहुत कम प्रभावित होंगी।

