लखनऊ।शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था तालीमी बेदारी के तत्वाधान में “गरीब बच्चों में ड्रॉपआउट की समस्या” विषयक सेमिनार का आयोजन रविवार को उर्दू एकेडमी गोमती नगर में किया गया।जिसके दानिश आज़ाद अंसारी अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री उत्तर प्रदेश बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। सिम्पोजियम की अध्यक्षता रिम्स् झारखंड के डायरेक्टर डा राज कुमार ने किया।

सेमिनार में देश प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ताओं,शिक्षाविदों और बुद्धजीवियों आदि ने हिस्सा लिया।सेमिनार में शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले देश के दर्जनों विभूतियों को व प्रतिभावान छात्र छात्राओं को सम्मानित भी किया गया।
देश के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डाॅ॰ ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम की याद में आयोजित सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय दानिश आज़ाद अंसारी गेस्ट ऑफ ऑनर,प्रो राज कुमार,नेपाल मुस्लिम आयोग के सदस्य,मिर्ज़ा अरशद बेग, मोहम्मद कमरुद्दीन ,रज़िया बेग़म,प्रो रोमा एस जोसेफ,प्रो अली खान महमूदाबाद आदि ने दीप प्रज्वलन कर किया।

अध्यक्ष डाॅ॰ वसीम अख्तर,निहाल अहमद,मारूफ हुसैन,शारिब खान,हिसामुद्दीन अंसारी,शोएब अख्तर,हसनैन कमाल,इमरान सिद्दीकी,डा अरिज कादरी,गुलशाद चौधरी आदि ने मुख्यातिथि और विशिष्ट अतिथियों का बुके और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानि किया।
मुख्य अतिथि दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि शिक्षा के महत्व को आत्मसात करके कलाम साहब ने देश को मजबूत बनाया।डॉ. कलाम साहब ने कहा था कि “शिक्षा का मिशन,प्रबुद्ध नागरिकों के निर्माण को सुनिश्चित करने की नींव है,जो एक समृद्ध,खुशहाल और मजबूत राष्ट्र बनाएंगे”।कलाम के शब्दों में”जब सीखना उद्देश्यपूर्ण होता है तो रचनात्मकता खिलती है,जब रचनात्मकता खिलती है तो सोच विकसित होती है।
श्री अंसारी ने कहा कि समाज एक बगीचे की तरह है। जब सभी फूल खिलेंगे तो बगीचा खूबसूरत दिखेगा।उन्होंने शिक्षा के प्रति सरकार की कोशिशों का उल्लेख किया।कहा कि सरकार समाज के कमजोर तबकों के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। ड्रॉपआउट को रोकने के लिए कोई चमत्कार की ज़रूरत नहीं है। सरकार अपना दायित्व बख़ूबी निभा रही है। ज़रूरत इस बात की है कि हम सब मिलकर लोगों को तालीम से जोड़ने की कोशिशों का हिस्सा बनें। हमारी छोटी-छोटी कोशिशें समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।
सोशल एक्टिविस्ट मोहम्मद कमरुद्दीन ने कहा कि शिक्षा से समझ बनती है। शिक्षा से सामाजिक-आर्थिक विकास संभव है। तालीमी बेदारी का काम काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समय ज्ञान और तकनीक का है। जिस देश के पास जितना ज्ञान होगा,वह देश उतना ही तरक्की करेगा।
डॉ रोमा एस जोसेफ ने कहा कि कलाम साहब के विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए फैक्टर ऑफ प्रोग्रेस जो कि शिक्षा है उसे फलदायक बनाना होगा। गरीबी, लिंग असमानता, सामाजिक असमानता के अलावा मूलभूत शैक्षिक सुविधाओं कमी वगैरह ड्रॉपआउट की दर को कम नहीं होने देते।हम अपने तौर पर इसे दूर करने में मदद कर सकते हैं। समुदाय स्तर पर हर कोई व्यक्तिगत तौर पर जुड़ कर ड्रॉपआउट के कारणों को समझ और समझा सकता है।
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद ने कहा कि ग़रीब बच्चों में ड्रॉपआउट की समस्या के पीछे समाज की सोच एक बड़ी वजह है। उन्होंने सुझाया कि सरकार के साथ-साथ समाज के संवेदनशील वर्ग को भी इस काम को मिलकर करने की ज़रूरत है।गेस्ट ऑफ ऑनर रज़िया बेगम ने कहा कि ड्राप आउट बच्चों के जीवन संघर्ष विशेषकर दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर प्रकाश डाला। दक्षिण एशिया के जाने माने न्यूरो सर्जन व पीजीआई के पूर्व प्रोफेसर राजकुमार ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में तालीमी बेदारी की पूरी टीम को मुबारकबाद देते हुए कहा कि तालीमी बेदारी का यह कारवां शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति लाएगा।कलाम साहब ने जो सपना देखा था उसे तालीमी बेदारी साकार करने में कामयाब हो ईश्वर से प्रार्थना है।
सोशल एक्टिविस्ट मुंबई मो कमरुद्दीन,प्रो रोमा जोसफ,मिर्ज़ा अरशद बेग सदस्य मुस्लिम आयोग नेपाल आदि ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये।शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र के में उल्लेखनीय योगदान के लिए दर्जनों अन्य विभूतियों को भी सम्मानित किया गया।सेमिनार में मेधावी छात्र-छात्राओें को भी सम्मानित किया गया।संचालन प्रदेश अध्यक्ष सगीर ए खाकसार ने किया।

