मुश्ताक अहमद
गोंडा।जिले के वजीरगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत सहिबापुर और बौगड़ा का मुहर्रम बेजोड़ है। यहां दूर-दूर से लोग ताजियादारों का जश्न-ए-अकीदत देखकर हैरत में पड़ जाते हैं। लगातार दो माह आठ दिन तक मौला हुसैन की शहादत का असर सिसकियां और अश्कों में सैलाब बनता है।

वजीरगंज विकास खंड के इन दो गांवों का मुहर्रम वाकई शिद्दत से होता है। जिसमें मुहर्रम पूरी अजादारी से एक माह आठ दिन मनाया जाता है।यूं तो मुहर्रम अन्य जगहों पर प्रायः दस दिन का ही होता है।लेकिन यहां खाना,शरबत,पानी और मजलिस के साथ मौला हुसैन की याद में मातम दस दिन विशेष रुप से किया जाता है।मुहर्रम के दौरान अपने रोजमर्रा के काम से विरक्त रहकर मातम में हिस्सा लेते हैं।
विदेश से आते हैं ताजिएदार
इन दो गांवों में खास तरह से मुहर्रम मनाने वाले लोगों के परिजन मातम के वक्त इकट्ठा जरुर होते हैं। यहां तक कि विदेशों में रह रहे लोग मुहर्रम के वक्त अपने घरों में जरुर दाखिल होते हैं।
स्वनिर्मित ताजिए से मनाते हैं मुहर्रम
यहां के अधिकांश ताजिएदार मुहर्रम में
स्वनिर्मित ताजिया ही चौक पर रखते हैं। जबकि ये कोई उनका व्यवसाय नहीं है। वे अपने हाथों से ही की गई कारीगरी पर ही विश्वास रखते हैं।
सातवीं पर मातम का माहौल फिजा में गूंजी या हुसैन की सदाएं
मुहर्रम की सातवीं तारीख को पूरा माहौल गमजदा हो उठा। फिजा में मातम के नारे और या हुसैन की सदाएं चारो ओर गूंजती रही। देश भर में मुहर्रम की सातवीं के मौके पर कई स्थानों पर बड़ी संख्या में अकीदत मंद एकत्र हुए। बड़ी संख्या में विभिन्न स्थानों से अलम के जुलूस निकालकर अपने गंतव्य पर पहुंचकर नज्र व फातिहा पढ़ा।

