रौजा गांव में सैयद सालार रज्जब अली हटीले शाह गाजी की मजार पर पीड़ितों को भूत-प्रेत से छुटकारा मिलने की है मान्यता
इमरान अहमद
गोंडा।दुनिया भर में अदालतों का निर्माण लोगों को न्याय दिलाने के लिए हुआ है। जिला स्तर से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट अलग-अलग तरह से मुकदमें सुनकर उस पर सुनवाई कर अपना फैसला लेती है। ये सब सुनने में सभी को आम लग रहा होगा। लेकिन वजीरगंज विकास खंड के रौजा गांव में सैयद सालार रज्जब अली हटीले शाह गाजी की दरगाह पर आपने कभी भूतों की अदालतों के बारे में सुना है। वाकई दरगाह शरीफ पर भूतों की अदालत लगाई जाती है। इस न्यायालय में सिर्फ भूतों की पेशी होती है और केस खत्म होने के बाद जलाने की सजा दी जाती है।

जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर गोंडा-अयोध्या हाईवे पर स्थित रौंजा गांव में सैयद सालार रज्जब अली हटीले शाह गाजी के दरबार में ज्यादातर मानसिक रुप से परेशान लोग आते हैं। यहां आने वाले पीड़ितों के परिजनों को विश्वास होता है कि उनके ऊपर भूत या किसी ऊपरी हवा का साया है। इसके साथ ही हर वृहस्पतिवार व रविवार को यहां हाजिरी होती है। जिसमें रोगियों को सफेद कागज लगाते ही भूत-प्रेत से पीड़ित लोग हरकत करना शुरू कर देते हैं और मरीज सिर पटक-पटक कर अपनी गलती मानते हैं। मान्यता है कि सैयद सालार रज्जब अली हटीले शाह गाजी मरीजों को भूत-प्रेत जैसी बंदिशों से मुक्त कराते हैं।
दरखास्त और सफेद कागज लगाते ही शुरू हो जाती अदालत
दरगाह शरीफ पर आने के बाद जब भूत-प्रेत से त्रस्त लोगों की दरगाह शरीफ में दरखास्त लगाकर मरीज को सफेद कागज लगाया जाता है। उसके बाद मरीजों का इलाज शुरू हो जाता है। भूत-प्रेत के असर से ये मरीज उटपटांग हरकतें करने लगते हैं। जिन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है।
जुर्म के हिसाब से भूतों को फांसी भी दी जाती है
यूं तो यहां हर दिन भूत-प्रेत से पीड़ित लोग पहुंचते हैं। लेकिन वृहस्पतिवार व रविवार का दिन खास होता है,जब भूतों की अदालत लगती है। मान्यता है कि सैयद सालार रज्जब अली हटीले शाह गाजी के यहां पेशी लगते ही भूत-प्रेत स्वयं जुर्म कबूल करने लगते हैं। गाजी के दरबार में भूतों को उनके जुर्म के मुताबिक सजा सुनाई जाती है। कुछ केसों में भूतों को फांसी तक की सजा दी जाती है।
अलग-अलग केस की अलग-अलग सजा
दरगाह शरीफ के खादिम सुलेमान शाह ने बताया कि तमाम ऊपरी हवाओं से परेशान लोग यहां आते हैं। पीड़ित बाबा की अदालत में पेशी पर पहुंचकर खुद स्वीकार करते हैं कि वे किस ऊपरी प्रभाव से उस व्यक्ति को परेशान कर रहे हैं। यहां आने वाले लोग यहां रहकर अपने मरीजों का इलाज करवाते हैं। मजार शरीफ पर सात खादिम हैं, जिनके जिले बंटे हुए हैं। जिस जिला से जो मरीज आता है। उसे खादिम के जरिए दरगाह शरीफ पर दरखास्त लगवाया जाता है। खादिम सुलेमान शाह ने बताया कि मरीजों को चिराग दिया जाता है। जो वह अपने घरों में जलाते हैं।
नौचंदी वृहस्पतिवार को उमड़ती है भीड़
इस्लामी माह के प्रथम वृहस्पतिवार को गाजी की मजार पर नौचंदी मेला लगता है। जिसमें जायरीनों की भारी भीड़ रहती है। देश एवं प्रदेश के कोने-कोने से आने वाले हजारों जायरीन बाबा के दरबार में माथा टेक कर दुवाएं मांगते हैं। मजार शरीफ पर मुस्लिम ही नहीं हिंदू भी बड़ी तादाद में पहुंचते हैं और नजराना चढ़ाते हैं। जेठ माह के प्रथम रविवार को यहां दो द्विसीय मेला लगता है।

