गोंडा।जनपद के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र मां बाराही धाम में एक बार फिर गंदगी और जल निकासी की बदहाल स्थिति सामने आ रही है। चैत्र नवरात्र के दौरान गोंडा की तत्कालीन जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने मंदिर परिसर को स्वच्छ एवं अतिक्रमण मुक्त करने का संकल्प लिया था।इस अभियान में उपजिलाधिकारी तरबगंज राजीव मोहन सक्सेना की अगुवाई में मंदिर प्रांगण को साफ-सुथरा कर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया गया था।
अभियान के दौरान अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने का प्रयास हुआ था, जिससे कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली थी। लेकिन यह प्रयास टिकाऊ नहीं रहा। अधिकारियों के तबादलों के बाद पुनः मंदिर परिसर में गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो गया है। जल निकासी की कोई स्थाई व्यवस्था न होने के कारण जगह-जगह जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने गंदगी का अंबार लगा है, जिससे आने-जाने वाले श्रद्धालु परेशान हैं। दुर्गंध और कीचड़ के कारण दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भारी असुविधा हो रही है। इससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच रही है और क्षेत्र की छवि भी धूमिल हो रही है।
विशेष बात यह है कि स्वच्छता अभियान की शुरुआत करने वाले उपजिलाधिकारी राजीव मोहन सक्सेना और जिलाधिकारी नेहा शर्मा दोनों का ही अब स्थानांतरण हो चुका है। इसके बाद से मंदिर की व्यवस्था फिर से अनदेखी का शिकार हो गई है।
अब सवाल यह उठता है की
👉 मां बाराही धाम की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है?
👉 क्या नए प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे?
👉 क्या गोंडा प्रशासन एक बार फिर मां बाराही धाम को उसका गौरव दिलाने के लिए गंभीर प्रयास करेगा?
स्थानीय श्रद्धालुओं और नागरिकों की मांग है कि मां बाराही धाम को पर्यटन एवं धार्मिक दृष्टिकोण से विकसित किया जाए,यहां स्थाई जल निकासी व्यवस्था,नियमित सफाई और अतिक्रमण नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
अब देखना होगा कि आने वाले समय में गोंडा का प्रशासन इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए कौन-कौन से कदम उठाता है।

