बगहा।बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में खरीफ फसल धान व गन्ना फसलों में छिड़काव के लिए यूरिया विगत 20 दिनों से गायब है चाहे बिस्कोमान भवन हो या पैक्स गोदाम सभी जगहों पर देखने के लिए एक बोरी यूरिया नहीं है। जिससे किसानों की समस्या और भी बढ़ गई है। हालाकि खासकर धान रोपनी के बाद अब सबसे बड़ी जरूरत किसानों को फसलों में यूरिया छिड़काव की जरूरत है ऐसे में यूरिया नहीं मिलने से किसान काफी परेशान दिख रहे हैं वहीं कुछ समर्थवान किसान महंगी कीमतों में यूरिया की खरीदारी कर अपने फसलों में यूरिया का छिड़काव कर रहे हैं जबकि माध्यम व निर्धन किसान यूरिया की किल्लत से अपने फसलों में यूरिया छिड़काव से वंचित हैं जिससे उनके फसलों का बिकास अवरुद्ध हो गया है साथ ही फसलों में तरह तरह के रोग लगना शुरू हो गया है जिसको देख किसान काफी परेशान दिख रहे हैं।
गौरतलब हो कि किसान यूरिया खाद को मनमाने दामों पर खरीदने के लिए मजबूर हैं। सरकारी मूल्य 266 रुपए की बजाय 500 सौ रुपए की मूल्यों पर कुछ दुकानदार अधिक दाम लेकर या यूरिया के साथ अन्य उत्पाद जबरदस्ती बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों को यूरिया खाद खरीदने जाने पर बिस्कोमान भवन व पैक्स गोदाम के संचालक के द्वारा कहा जाता है कि अभी यूरिया खाद नही हैं। यूरिया खाद्य आने के बाद ही मिलेगा। किसानों को देखते ही देखते 20 दिनों से अधिक हो गया लेकिन अब तक किसानों को यूरिया खाद्य मिलने का कोई आसार नही दिख रहा है। बता दे कि किसान मजबूर होकर उचित मूल्य के बजाय उच्च दरों में यूरिया खाद लेना पड़ रहा हैं। कुछ किसानों का कहना है कि दुकानदारों ने दुकान में यूरिया खाद रखने के बजाए दूसरे जगहों पर छुपा कर रखा गया है। जो जांच का विषय है। दिखावे के लिए थोड़ा बहुत जल्द बाजी में बांटते हैं और शेष यूरिया खाद्य को 450 से 500 सौ रूपए में बेच दिया जाता है। किसानों का कहना है कि प्रत्येक पंचायत में कृषि पदाधिकारियों द्वारा पंचायत स्तर पर निगरानी सौंपी जाए,जिससे कालाबाजारी पर लगाम लग सकें। वही इस तरह की रवैया से अधिकारियों पर कई तरह सवाल किसानों द्वारा उठ रहा हैं। यूरिया खाद की कालाबाजारी कुछ दुकानदार यूरिया की कमी का फायदा उठाकर अधिक दामों पर बेच रहे हैं, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है।

