उतरौला,बलरामपुर।नगर के आर्यनगर,बरदही बाजार मैदान,पिपरा मोड़ तिराहा पर चल रहे पंचदिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन प्रेममूर्ति युवा संत सर्वेश महाराज (नया घाट वशिष्ठ भवन,श्रीअयोध्या धाम) ने भगवान श्रीराम के अवतरण के गूढ़ रहस्यों पर आध्यात्मिक प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
संत सर्वेश महाराज ने श्रीरामचरितमानस की चौपाई
“राम जन्म के हेतु अनेका, परम विचित्र एक ते एका।।”
का संदर्भ लेते हुए बताया कि प्रभु श्रीराम के अवतरण के अनेक कारण थे,किंतु एक कारण सबसे विशिष्ट और विचित्र था।
उन्होंने कथा में उल्लेख किया कि एक बार भगवान विष्णु के परम पार्षद जय और विजय को सनकादिक ऋषियों के श्राप के कारण तीन जन्मों तक राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा। इस श्रापवश वे पहले कल्प में रावण और कुंभकरण के रूप में जन्मे। उनके उद्धार हेतु स्वयं भगवान विष्णु ने भगवान श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया।

श्री महाराज ने यह भी बताया कि भगवान के अवतार की यह लीला केवल राक्षसों का संहार नहीं,बल्कि धर्म की स्थापना और प्रेम,सेवा,त्याग एवं मर्यादा का विश्ववंद्य आदर्श भी था। इस दिव्य लीला में देवी लक्ष्मी सीता के रूप में शेषनाग लक्ष्मण के रूप में, ब्रह्मा जी जामवंत और स्वयं भगवान शंकर हनुमान रूप में अवतरित हुए और राम कार्य में सहभागी बने।
इस दिव्य ज्ञानयुक्त प्रसंग का वर्णन करते हुए श्री महाराज ने श्रद्धालुओं को बताया कि जब माता पार्वती ने भगवान शंकर से श्रीराम अवतार का कारण पूछा तब शिवजी ने यह रहस्योद्घाटन किया,जो श्रीरामचरितमानस में अनेकों स्थलों पर संकेत रूप में प्रकट होता है।
इस कथा में श्रोतागणों के बैठने से लेकर आवश्यक चीजों जैसे कि जल/प्याऊ की व्यवस्था का प्रबंध बाबा श्री दुःखहरण नाथ मन्दिर सेवा समिति उतरौला के द्वारा की गई हैं।
श्रोताओं ने पूरे भाव और भक्ति से कथा श्रवण किया। कथास्थल पर श्रद्धा की बयार बहती रही, भजन-कीर्तन और हरि नाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर बाबा श्री दुःखहरण नाथ मंदिर सेवा समिति, उतरौला के सभी सदस्यगण, नगर के सम्मानित जन मयंक गिरि, फूलचंद शास्त्री, त्रिपुरारी गिरि, अर्पित गुप्ता, महेंद्र प्रताप सिंह, अरुण साहू, सर्वेश यादव, शिवम कौशल सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पंचदिवसीय श्रीराम कथा का यह चौथा दिन श्रीराम अवतार के दार्शनिक, आध्यात्मिक और लौकिक उद्देश्य को हृदयंगम करने वाला सिद्ध हुआ।

