इमरान अहमद
गोंडा।मौसम का तापमान बढ़ने के साथ ही जनपद वासियों की धुकधुकी भी तेज हो गई है। कारण कि बढ़ रहे अगलगी के खतरे पल झपकते ही पीड़ितों के सारे मंसूबों को राख में तब्दील कर देते हैं। चिंगारी भड़कने पर बचाव की राह नहीं सूझती। अब गंभीर सवाल यह है कि जिले के वजीरगंज के लोगों को गृहस्थी के बचाव के लिए हर चुनावों में फायर स्टेशन के वादे किये जाते रहे।लेकिन इस ओर कोई ठोस पहल न होने से अबतक उनमें निराशा ही हाथ लगी।अब प्रदेश में 2027 चुनाव होना है ऐसे में नेताओं को भले ही अग्निशमन केंद्र का पुराना वादा विसर गया हो।लेकिन वजीरगंज के अग्निपीड़ितों में इसे लेकर असंतोष की ज्वाला भड़क सकती है।
बता दें कि मार्च,अप्रैल,मई माह में इन खतरों से निपटने के लिए शासन प्रशासन के अलावा अग्निशमन विभाग के पास क्या व्यवस्था है। वह ऐसे गंभीर परिस्थितियों में कैसे निपटेगा। फायर ब्रिगेड के पास सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त संसाधनों के कमी की है। ऐसे में लोगों के खौफजदा होने की बात स्वाभाविक ही है। यहां की 75 ग्राम पंचायतों समेत अन्य क्षेत्रों में अग्निकांडों के हादसों पर काबू पाने की जिम्मेदारी सम्हाल रहा फायर ब्रिगेड खुद तमाम तरह की कमियों से घिरा हुआ है। दशकों पुराने मानक के आधार पर मुहैया संसाधन आज के परिवेश में कसोटी पर खरे उतरने में नाकाम साबित हो रहे हैं। निरंतर बढ़ रहे जरुरतों के अनुरूप संसाधनों में बढ़ोतरी नहीं हो पाई है।
वजीरगंज विकास खंड में बीते वर्षों में हुए नुकसान के आंकड़ों पर गौर करें तो लाखों की संपत्ति के अलावा हुई जन हानि की भरपाई कैसे की जा सकती है। यहां तो अग्निशमन केंद्र के लिए भूमि की भी तलाश अभी तक नहीं हो पाई है। ऐसे में उधारी के संसाधनों के बलबूते आगजनी की घटनाओं के वक्त काबू पाने का जद्दोजेहाद की जाती है।
इस मामले में अग्निशमन अधिकारी बताते हैं कि जब तक सरकार व्यवस्थाओं का विस्तार नहीं करती तब तक वह इन्हीं संसाधनों को लेकर जरुरतों पर मुस्तैद रहेंगे। दुर्गा प्रसाद शुक्ला, सफात अहमद, अंकुर सिंह, शिवपूजन सिंह कहते हैं कि वायदे तो बहुत होते हैं, पर पूरा कोई नहीं करता।

