गंगा-जमुनी तहजीब के इस शहर में बहुत कुछ ऐसा है जो उम्मीदों को नई सोच को उड़ान देता है, हर तरफ ऐतिहासिक धरोहरें नजर आती हैं
सियासतों के बीच यहां है ढेरों विरासतें भी
गंगा जमुनी शहर में दिखता है सौहार्द का संगम
मुश्ताक अहमद
गोंडा।गोंडा का नाम आते ही पता नहीं क्यों लोग मुंह बिचकाने लगते हैं, जिन्होंने यहां जन्म लिया और जो बाहर के हैं, बस गोंडा सुनते ही अजब प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। अब इसे नजर और नजरिए का फेर कहें या कुछ और लेकिन लोगों को तस्वीर बदरंग ही नजर आती है। गंगा जमुनी तहजीब के इस शहर में ऐसा भी बहुत कुछ है जो उम्मीदों को नई सोच के पंख देता है।

महाराजा देवी बक्स सिंह से लेकर जनकवि अदम गोंडवी की इस सरजमीं पर सौहार्द और स्नेह के अटूट रिश्तों की तासीर और तस्वीर दोनों देखने को मिलती है। ‘यूपी लाइव’ ने कुछ ऐसी ही तस्वीरें खोज कर निकाली है जो शायद सोच को नया आयाम दे। ये माना कि यहां की सियासत ने वो फर्ज नहीं निभाया, वो हक नहीं, नहीं अदा किया जो करना चाहिए था लेकिन इसके बावजूद बहुत कुछ ऐसा है जो जिले की विरासत को नुमाया करता है। कभी-कभी अप्रिय हालातों में भी रिश्तों की बर्फ खूबसूरती से पिघलती है। यही वजह है कि त्योहार किसी का भी, खुशियां एक साथ बांटी जाती हैं। आइए फिर आपको शहर घुमाकर लाते हैं।

शहर का दिल चौक
पहले चलते हैं शहर के दिल कहे जाने वाले चौक बाजार में। यहां की सुबह और शाम दोनों सुहानी होती है। भरत मिलाप चौराहा इस चौक की धड़कन है। दांए देखिए तो खान-पान के साथ सड़क पर तमाम ठेले और दुकानें दिखाई देती हैं। अरे हां यहां खरीदारी हर तबके के लोग करते हैं। चौक का भी अपना एक इतिहास है, वहीं आज विरासत को संजोए अपनी रौनक बिखेर रहा है। इसी चौक की बांई ओर भी सजी संवरी बाजार है। आप चाहें तो बर्तन खरीदे, कपड़े या लइया, चना सब हाजिर है।
चौक से आगे बढ़िए तो क्रांतिकारी महानायक राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की प्रतिमा है। एक ओर कश्मीर सिंह जी का बुजुर्ग मुस्कुराता चेहरा, दूसरी ओर मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़। अब देखने वालों का नजरिया है किस नजर से देखें। अरे हां यहां मजदूरों की मंडी भी एक विरासत की ही तरह है।
अदब का भी दृश्य
वहीं अदब की दुनिया की सैर करनी हो तो आइए जिगर मुरादाबादी साहब की मजार तक चलते हैं। यहां जिगर मुरादाबादी की मजार जिले की अदबी विरासत को नुमाया करती है। इसी जिले के जनकवि अदम गोंडवी भी रहे हैं।
सौहार्द भी देखें
कहीं मंदिर मस्जिद एक साथ खड़े सौहार्द का संदेश देते नजर आए तो कभी अदम गोंडवी मैदान की दीवार पर लगा इंसानियत का कोई संदेश। अब पढ़ने वालों के ऊपर है वो इसे कैसे देखते हैं।
कुछ इधर भी
शहर में कभी मस्ती से दौड़ती इक्का गाड़ी अतीत के झरोखे खोलती है। बाजार से थोड़ा आगे एक दवा की बड़ी सी दुकान पर श्री श्री रविशंकर की मुस्कुराती तस्वीर बहुत से दर्द कम कर देती है। घूमते फिरते सगरा तालाब के किनारे आइए, इस पानी ने शहर का इतिहास देखा है। आज भी गाहे-बगाहे लोग यहां घूमते मिल जाते हैं।
बदलता मौसम
एक दूसरे नजारे को देखें तो आजकल बदलते मौसम में बारिश की पहली बूंद धरती पर पड़ने से जरा पहले का दृश्य दिखता है। मानों आसमान कह रहा हो मेरे आंसू बहने को हैं, दर्द को संभालना धरती मैय्या। इन्हीं सब नजारों के बीच शहर की अपनी ख्वाहिशें हैं जो कभी न कभी पूरी होंगी।

