मुश्ताक अहमद
गोंडा।गरीबी उन्मूलन के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों को कितना मिलता है, इसके आंकलन के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। गोंडा जनपद के वजीरगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत बाल्हाराई निवासिनी रशीदा (40) वर्ष काफी है। आज भी वह फूस के घर में रह रही हैं। इसे अबतक कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली। अलबत्ता रशीदा दर्जनों बार ब्लाक के अधिकारियों से लेकर जिला स्तर के हुक्मरानों को अपनी पीड़ा सुनाने के लिए अपनी चप्पलें घिस चुकी है। लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। जी हां क्षेत्र में ऐसी तमाम रशीदा को उपेक्षा एवं गंवई राजनीति की शिकार होते देखा जा रहा है। जिन्हें दरकार है तो संकल्प की उस लाठी की जो इनके जीवन से गरीबी को खदेड़ कर सरकारी योजनाओं का लाभ दिला सके।
रशीदा कहती है कि मेहनत मजदूरी करके अपना व बच्चों का पेट पाल रही हूं। यदि परिवार में कोई बीमार हो गया तो उनके इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता है। उसकी इस स्थिति के बावजूद आज तक उसे आवास नहीं दिया गया।
जबकि सरकार द्वारा गरीबों के लिए कई आवासीय योजनाएं चलाई जा रही हैं। मौजूदा ग्राम प्रधान उसे आवास दिलाने के लिए प्रयास नहीं कर रहे हैं। और न ही आवास की सूची में उसका नाम ब्लाक को भेजा गया है। प्रधान द्वारा रशीदा को आवास दिलाने की दिशा में पहल न करने के कारण वह इस योजना से वंचित हैं। उसने आवास के लिए ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से गुहार की, लेकिन उसे मायूसी ही हाथ लगी। आलम यह है कि अब उसके लिए सरकार की आवासीय योजनाएं बेमानी है। रशीदा अपने फूस के घर को ही अपना मुकद्दर समझ रही है।
गंवाई राजनीति की शिकार हुई रशीदा
रशीदा को आवास का लाभ न मिलने का सबसे बड़ा कारण उसकी अति गरीबी तो है ही,साथ ही गांव की राजनीति भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। रशीदा लाख चिल्लाएं लेकिन उसका कोई सुनने वाला नहीं है। ग्राम विकास अधिकारी तो वही करते हैं जो प्रधान जी कहते हैं।
‘इस संबंध में ग्राम प्रधान मीना ने बताया कि पात्रता सूची के आधार पर आवास दिया जाता है यदि सूची में उसका नाम होगा तो उसे आवास दिया जायेगा’।

