मुश्ताक अहमद
गोंडा।हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत की दीवार खड़ी करने वाले अमन के दुश्मनों को ऐसे लोगों से सीख लेनी चाहिए। जो न हिन्दू है,न मुसलमान।वे सिर्फ इंसान है।साम्प्रदायिक सौहार्द की वास्तविक तस्वीर देखनी है तो वजीरगंज चले आइए। यहां होलिका में फिरकापरस्ती का दहन होता है। सदभाव की मिसाल इस कस्बे के झिलाही मोड़ पर स्थित मस्जिद के सामने होलिका रखी जाती है। दोनों समुदाय के लोग आपसी मेलजोल के साथ ही रंगों का पर्व मनाते हैं। होली का त्योहार आपसी एकता के साथ यहां मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यहां की भाईचारे की अदभुत विरासत दूर-दूर तक फैली हुई है। फागुनी बयार बहने के साथ ही सूफी संतों की इस पवित्र धरती के हिंदू-मुस्लिम परिवार होली की तैयारियों में जुट जाते हैं।
यहां होता है होलिका दहन
वजीरगंज कस्बे के झिलाही मोड़ पर स्थित जिन्नाती मस्जिद के सामने होलिका दहन होता आ रहा है। मस्जिद के सदर भी इस परंपरा का निर्वाहन कर रहे हैं। होलिका दहन के बाद हिंदू आग लेकर अपने घर जाते हैं। और व्यंजन बनाकर होली का आगाज करते हैं। भगोहर के प्रधान रामचरित्र तिवारी के मुताबिक यह रीति रिवाज सालों से चला आ रहा है। होलिकोत्सव में मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं।
आपसी एकता का त्योहार
वजीरगंज ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान एजाज खां कहते हैं कि होली का त्योहार आपसी समझ व एकता का त्योहार है। हम एक दूसरे के घर पर आते जाते हैं और गले मिलकर होली की बधाई देते हैं। जिन्नाती मस्जिद के इमाम कारी आरिफ कहते हैं कि होली का पर्व सदभावना एवं सौहार्द का त्योहार है। सभी इसे मिलजुल कर मनातें हैं। मौलाना अफजल हुसैन कहते हैं कि त्योहार दोनों धर्मों के लोगों को आपसी मुहब्बत में रहने की सीख देता है। प्रदीप तिवारी ने कहा कि होली और ईद के मौके पर गले मिलकर शुभ कामना देते हैं। डा० अविनाश पाण्डेय ने कहा कि कोई भी त्योहार हो आपस में मेल-मिलाप से रहने का संदेश देता है।और त्योहार के मकसद को मानना चाहिए,ताकि भाईचारा बना रहे।

