इमरान अहमद
गोंडा।पुलिस,सेना,पंचायत,खेल आदि में अपने हुनर का लोहा मनवाने वाली महिलाओं ने अब खेती-किसानी में भी अपने कदम को आगे बढ़ा दी हैं। इससे अब तक पुरुष प्रधान माना जाने वाला किसानी में महिलाओं का वर्चस्व बढ़ने लगा है। यह उनके लिए न सिर्फ स्वावलंबन का जरिया बन रहा है, अपितु जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहा है। जिले की कई महिलाएं प्राकृतिक खेती कर रसायनमुक्ति व रोगमुक्ति का संदेश भी दे रहीं हैं। इससे दूसरी महिलाएं भी सीख लेकर आगे बढ़ रही हैं। उनके इस कदम को पर्यावरण के नजरिए से काफी सराहना मिल रही है।
गोंडा जिले के वजीरगंज विकास खंड की दर्जनों ग्राम पंचायतों में विभिन्न संगठनों की मदद से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने में कई महिलाओं ने किसान के तौर पर दक्षता हासिल की है। उन्होंने रसायनिक खादों को छोड़कर प्राकृतिक ढंग से कंपोस्ट खाद के जरिए खेती शुरू की। यहां की ग्राम महादेवा की गायत्री ने अपने इर्द-गिर्द की गांवों बौगड़ा, भगोहर, करनीपुर, खीरीडीह, जमादार पुरवा, हाथी दूबे पुरवा, रसूलपुर, चड़ौवा की दर्जनों महिलाओं को प्रेरित किया। अब ये महिलाएं जैविक खेती की सेतु बनी है। गायत्री बीते चार वर्षों से सिस्टम आफ राइस इंटीफिकेशन (एसआरआई) के जरिए धान और इसी विधि एसडब्ल्यूआई से गेहूं पैदा कर रही है। इनकी खेती का खास पहलू यह है कि बीज उत्पादन आधार बीज से करती हैं। और सहकारिता पद्धति से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को यह बीज उपलब्ध कराती है। वह घरों के कचरे व गोबर से कंपोस्ट खाद तैयार करती हैं। इसी खाद से फसलों व सब्जी की प्राकृतिक खेती करती है। यह जिले के लिए उम्मीदों की नई शुरुआत है।
उम्मीद की नई किरणें
महिलाओं के स्वावलंबी जीवन के लिए क्षेत्रीय गांधी आश्रम से संचालित सूत कताई केन्द्रों का पुनरुद्धार होने के आसार।
बाल विकास परियोजना के तहत आधा दर्जन अत्याधुनिक किंडर गार्डन पद्धति के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना शुरू।
केएनआई के गृहविज्ञान विभाग की ओर से कुपोषण के विरुद्ध अभियान,कई गांवों की छात्राओं ने लिया गोद।

