▶नेपाल में भारतीय इमामों को दी जा रही है खास तवज्जो,अब तक कई इमाम जा चुके हैं तरावीह पढ़ाने
मुश्ताक अहमद
गोंडा।पवित्र माह रमजान में पड़ोसी मुल्क नेपाल में भारतीय ‘इमामों’ और ‘मोअज्जिनों’ की डिमांड बढ़ी है। इमाम मस्जिदों में पंचगाना नमाज के साथ तरावीह की नमाज अदा कराते हैं और मोअज्जिन अजान देते हैं। मोअज्जिन एक तरह से इमाम का सहयोग करता है। उसकी गैर हाजिरी में नमाज भी अदा कराता है। अरबी में माहिर ऐसे हाफिज (जिन्हें कुरान याद होता है) और कारी (जो खूब सूरत अंदाज में कुरान पढ़ते हैं) उनका पड़ोसी मुल्क नेपाल में मांग ज्यादा है।
नेपाल में भारतीयों को खास तवज्जो (महत्व) दिया जाता है। जनपद के विभिन्न मदरसों से पढ़कर निकले तालिबइल्मों को यहां अच्छा मौका मिल जाता है। नेपाल के कई जिलों की मस्जिदों में नमाज तरावीह पढ़ाने के लिए अपने यहां भारतीय इमाम रखना चाहते हैं।
क्या थी शर्तें
नेपाल के इमामों ने चयन के लिए कई खास शर्तें रखी है। जैसे दुरुस्त अकीदा हो,कुरान का मुकम्मल हिफ्ज, उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच,पान,गुटखा,बीड़ी और ऐसी ही नशीली वस्तुओं का सेवन न करता हो।
नेपाल गये कई इमाम
रमजान माह में इमाम और मोअज्जिन के बढ़े संकट के बीच नेपाल के कई मस्जिदों में तरावीह की नमाज पढ़ाने के लिए गए हैं। नेपाल के कई जिलों की मस्जिदों में इमामों ने वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और दूर भाष के माध्यम से इमाम और मोअज्जिन को तरावीह की नमाज पढ़ाने की सूचना दी थी।
किन-किन जिलों में विशेषज्ञों की मांग
नेपाल में भारतीय ‘इमामों’ हैं लेकिन इनकी संख्या कम है। बांके, वरदिया,पालपा,कृष्णानगर और नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारतीय ‘इमामों’ की ज्यादा मांग है। जिले के इमाम और मोअज्जिन काफी तादाद में नेपाल की मस्जिदों में नमाज-ए-तरावीह पढ़ाने गये हैं।
क्या है आम राय
जनपद की एक मस्जिद के इमाम मौलाना अफजल हुसैन का कहना है कि एक दोस्त नेपाल की राजधानी काठमांडू की मस्जिद में इमाम हैं। बताया कि उनके पास भी कई बार आफर आया लेकिन वतन से मुहब्बत के कारण हिम्मत नहीं कर सके। दूसरा सभी को अपने घर परिवार की भी दिक्कतें होती है। इस नाते ज्यादातर लोग बाहर जाने से कतराते हैं।

“नेपाल में पवित्र माह रमजान में भारतीय ‘इमामों’ और मोअज्जिनों की संख्या बढ़ी है। इसकी एक वजह अरबी भाषा की अच्छी समझ और साफ उच्चारण भी है। नेपाल में भारतीय ‘इमामों’ और मोअज्जिनों की खास पहचान है”।
“मौलाना कारी अफजल हुसैन” इमाम खलील जामे मस्जिद पूरे तिवारी।

