मुश्ताक अहमद
गोंडा।प्रदेश में 24 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं हो रही हैं। बोर्ड इम्तिहान की अपनी तैयारी कर परीक्षाएं करा रही है। तो आइए इन्हीं तैयारियों के बीच हम आपको कुछ जरूरी जानकारी दे रहे हैं।
ऐरा मेडिकल कॉलेज लखनऊ के मनोचिकित्सक डॉ० एम० जेड० मनदर्शन ने दूर भाष पे बताया कि अधिकांश छात्रों को परीक्षा तिथि के पूर्व की रात बड़ी कष्टकारी एवं बेचैनी मनोदशा से भरी होती है। नतीजन वह इस रात को न तो समग्र नींद ले पाते हैं, बल्कि एक चिंतित अर्धनिद्रा जैसी स्थिति में पूरी रात कट जाती है। जिसका असर उनके परफार्मेंस पर पड़ सकता है। परीक्षा तिथि की इस पूर्व रात्रि मनोदशा को मनदर्शन मिशन ने ‘पेपर-पैरासोमनिया’ कहा है।
तो लें मेलाटोनिन टानिक
ऐरा मेडिकल कॉलेज लखनऊ के किशोर मनोपरामर्शदाता ने बताया कि छ: से आठ घंटे की स्वस्थ नींद के लिए हमारे मस्तिष्क में पर्याप्त मात्रा में ‘मेलाटोनिन’ नामक मनोरसायन का ‘कार्टिसल’ की मात्रा काफी बढ़ जाने के कारण ‘मेलाटोनिन’ का स्तर बहुत कम हो जाता है।
जिससे हमारी नींद तो दुष्प्रभावित होती ही है, साथ ही ‘मेलाटोनिन’ की कमी से हमारे मन में उत्साह व आत्म विश्वास पैदा करने वाले मनोरसायन ‘सेराटोनिन’ का भी स्तर काफी कम हो जाता है। जिससे छात्र की सुबह चुस्त दुरुस्त न होकर निस्तेज व थकी-मांदी होती है। और फिर यही मनोदशा लेकर छात्र परीक्षा देने पहुंच जाता है।
ये हैं लक्षण
उन्होंने बताया कि पेपर पैरासोमनियां में निद्रा के दौरान ऐसे सपने आ रहे हैं, मानों हम परीक्षा हाल में बैठे हुए हैं। और हमें किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं आ रहा है या घर से परीक्षा देने के लिए निकले तो हैं लेकिन समय से परीक्षा स्थल पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। परीक्षा छूट जाने तक की नौबत आ गई है या परीक्षा का समय समाप्त होने की कगार पर आ गया है। ऐसे में फिर छात्र चौंक कर उठ सकता है और वह भयाक्रांत व हड़बड़ाया हुआ हो सकता है। और उसकी धड़कन व सांस की गति असामान्य रूप से बढ़ी हो सकती है। वह चीखना-चिल्लाना व रोना शुरू कर सकता है। इसे ‘स्लीप-ट्रेमर’ नाम से जाना जाता है। इसके अलावा ‘नाइटमेयर’ नामक स्लीप अटैक पड़ने की भी संभावना रहती है। सोते समय मांशपेशियों में टपकन, झनझनाहट, खिंचाव व दर्द, पैर का पटकना, नींद में बड़बड़ाना, शारीरिक शून्यता के लक्षण दिखाई पड़ सकतें हैं।
ऐसे करें बचाव
जरुरत इस बात की है कि परीक्षा तिथि से पूर्व की रात्रि छात्र शांत संतुष्टि के मनोभाव से छः से आठ घंटे की गहरी नींद अवश्य लें। सोने से पहले अपने मन को अगले दिन की परीक्षा की विषय-वस्तु व अन्य सोच विचार से मन को आसक्त न होने दें। बल्कि आत्म-संतुष्टि व आत्म-विश्वास भरे मनोभाव से कुछ मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से धीरे-धीरे नींद को अपने ऊपर हावी होने दें। इस प्रकार छात्र को स्वस्थ नींद की प्राप्ति होगी और फिर उसके अगले दिन की परीक्षा प्रदर्शन भी अच्छा रहने की प्रबल संभावना होगी।

